Sonbhadra News : भाजपा में "भीतरघात" की आहट! जिलाध्यक्ष के खिलाफ बगावत, 2027 से पहले संगठन में सियासी भूचाल के संकेत
2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर सुलग रही नाराजगी अब खुलकर बगावत में बदलती नजर आ रही है। संगठन के अंदर न सिर्फ नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर असंतोष है, बल्कि जातिगत खींचतान के....

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11:29 AM, April 15, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर सुलग रही नाराजगी अब खुलकर बगावत में बदलती नजर आ रही है। संगठन के अंदर न सिर्फ नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर असंतोष है, बल्कि जातिगत खींचतान के आरोपों ने भी माहौल को और गरमा दिया है। वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की अनदेखी और कथित अपमान के साथ-साथ जातीय पक्षपात के आरोपों ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है। जिलाध्यक्ष के खिलाफ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का गुस्सा सोशल मीडिया से लेकर बंद कमरों की बैठकों तक पहुंच गया है। म्योरपुर के सैनिक ढाबा पर हुई आपात बैठक ने साफ संकेत दे दिया है कि मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचने वाला है।
अपमान से भड़की चिंगारी, इस्तीफे से बढ़ी आग -
विवाद की जड़ हाल ही में हुई एक भाजपा बैठक बताई जा रही है, जहां देर से पहुंचे नौडीहा बूथ संख्या 199 के अध्यक्ष उमेश चौबे को कथित तौर पर जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता ने फटकार लगाते हुए बैठक से बाहर कर दिया। इस घटना से आहत बूथ अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर खुलकर नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी दायित्वों से इस्तीफा दे दिया।
इस घटना के बाद कार्यकर्ताओं में आक्रोश की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक विरोध के स्वर तेज हो गए, जिसने अब संगठित रूप ले लिया है।
म्योरपुर में ‘गुप्त’ बैठक, खुलकर बरसे वरिष्ठ कार्यकर्ता -
म्योरपुर स्थित सैनिक ढाबा पर बुलाई गई बैठक में जिले के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली कार्यकर्ता एकजुट हुए। बैठक में जिलाध्यक्ष की कार्यशैली पर तीखा हमला बोलते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि संगठन को खड़ा करने वाले पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी हो रही है, बल्कि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित भी किया जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष की कार्यशैली को “तानाशाही” बताते हुए कहा कि इससे संगठन की जड़ों में असंतोष पनप रहा है।
वरिष्ठों का अपमान, पड़ न जाए संगठन पर भारी -
बैठक में मौजूद नेताओं ने साफ कहा कि यदि समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं बचा, तो संगठन की मजबूती पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने चेताया कि यह असंतोष यदि समय रहते नहीं सुलझा, तो आगामी चुनावों में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अब आर-पार की तैयारी, प्रदेश नेतृत्व तक जाएगी बात -
बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि अब यह लड़ाई स्थानीय स्तर पर नहीं लड़ी जाएगी, बल्कि इसे प्रदेश नेतृत्व के सामने मजबूती से रखा जाएगा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने दो अहम फैसले लिए जिसमें प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री और क्षेत्रीय अध्यक्ष को विस्तृत शिकायती पत्र भेजने और जिलाध्यक्ष नन्दलाल गुप्ता के व्यवहार की जांच और कार्यकर्ताओं के सम्मान की रक्षा की मांग की जाएगी।
दिग्गजों की मौजूदगी से बढ़ा सियासी वजन -
इस विरोध बैठक में सोना बच्चा अग्रहरि, पन्नालाल जायसवाल, अमरकेश सिंह, विष्णु कांत द्विवेदी, सत्येंद्र सिंह और श्याम नारायण सिंह जैसे वरिष्ठ चेहरों की मौजूदगी ने इस बगावत को और मजबूत बना दिया। इनके साथ प्रमोद दुबे, चिंतामणि दुबे, शतरूपा सिंह और वसंत देव पांडे समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया।
2027 की राह में ‘अंदरूनी कलह’ बन न जाए बड़ा खतरा -
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा जिलाध्यक्ष की कार्यशैली अब केवल व्यक्तिगत नाराजगी तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि यह सीधे-सीधे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही हैं। खासतौर पर सवर्ण समाज की कथित उपेक्षा और संगठन में बढ़ती असंतुलन की भावना भाजपा के लिए चुनावी समीकरण बिगाड़ सकती है। यदि यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो 2027 विधानसभा चुनाव में इसका असर सीधे संगठन की एकजुटता पर पड़ सकता है। सोनभद्र जैसे अहम जिले में बूथ स्तर तक असंतोष फैलना पार्टी के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। ऐसे में यह साफ है कि अगर प्रदेश नेतृत्व ने जल्द ही हालात नहीं संभाले, तो सोनभद्र में भाजपा के लिए 2027 की राह उतनी आसान नहीं होगी, जितनी अभी मानी जा रही है।



