Sonbhadra News : कहीं उधार तो कहीं अपने वेतन से मिड डे मील की रसोई संभाल रहे मास्टर जी
मंहगाई और कंवर्जन कास्ट नहीं मिलने से मिड डे मिल के संचालन में शिक्षकों क़ो दिक्क़तों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षक या तो उधार या फिर अपने वेतन से बच्चों की सेहत और एमडीएम की रसोई का ध्यान रख रहे हैं।

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11:49 AM, August 3, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
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सोनभद्र । जनपद में मिड-डे-मील योजना की स्थिति बदहाल है। आलम ये है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मिड-डे मील कहीं उधार पर चल रही है तो कहीं शिक्षकों को अपनी सैलरी खर्च कर बच्चों का भोजन बनवाना पड़ रहा है। जहां उधार चल रहा है, वहां और भी परेशानी है। राशन की खरीद के लिए शिक्षकों को दुकानदारों की खरी-खोटी भी सुननी पड़ रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों का हाल और भी खराब है।
बताते चलें कि सोनभद्र जिले में 2061 विद्यालय हैं, इनमें 2.71 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। इन बच्चों के लिए स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना संचालित है। योजना के तहत बनने वाले भोजन का खाद्यान्न तो राशन से मिल जाता है, लेकिन सब्जियां, दाल, मसाले, फल एवं रसोई गैस बाजार से खरीदने होते हैं। इसके लिए शासन से कन्वर्जन कास्ट उपलब्ध कराया जाता है।
दो महीने से कोई राशि नहीं मिली -
शिक्षकों ने परेशानी बताते हुए कहा कि दो माह से मिड-डे-मील की राशि नहीं मिली है। खाद्यान्न सामग्री खरीदने और उसे पकाने की समस्या उत्पन्न होने लगी है। प्राचार्य किसी तरह बाजार से उधार का राशन, गैस लाकर बच्चों को खिला रहे हैं। इसका असर बच्चों के गुणवत्तापूर्ण भोजन पर भी पड़ रहा है।
महंगाई भी बड़ी समस्या -
शिक्षकों ने बताया कि हाल में हुई बारिश के बाद सब्जी की कीमतें बढ़ गई हैं। जिन दुकानों से सामग्री खरीदते हैं, वहां के दुकानदार पैसे मांग रहे हैं। शिक्षकों ने कहा कि 1100 रुपये गैस की कीमत हो गई है। 200 रुपए तेल की कीमत है, शिक्षक कितने दिनों तक बिना कंवर्जन कास्ट मिले खाना खिला सकते हैं।
उत्तर प्रादेशिय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष योगेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि "अप्रैल माह तक की कन्वर्जन काॅस्ट उपलब्ध कराई गई है। मई के 20 दिन एवं जुलाई माह की कन्वर्जन काॅस्ट अभी तक जारी नहीं की गई है। एमडीएम के लिए कंवर्जन कास्ट समय से उपलब्ध नहीं कराई जाती। इससे शिक्षकों के सामने समस्या रहती है। जिसमें भी अधिकारियों द्वारा कमियां दर्शाकर शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई कर दी जाती है, जो बिल्कुल गलत है। कभी-कभी विद्यालयों को खाद्यान्न भी समय से प्राप्त नहीं होता है। शासन को एडवांस में धन भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे शिक्षकों को अपने पास से धन खर्च न करना पडे़। रसोइयों का मानदेय भी कई महीने तक लटका रहता है।"
यूटा जिलाध्यक्ष शिवम अग्रवाल ने बताया कि "अप्रैल 2024 के बाद से मिड डे मील संचालन के लिए कोई भी धनराशि बैंक खातों में नहीं भेजी गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षक कभी उधार लाकर तो कभी अपने वेतन के पैसे से बच्चों क़ो मिड डे मील खिला रहे हैं।"
इस बाबत जिला समन्वयक एमडीएम रमेश चौरसिया ने बताया कि "शासन से कंवर्जन कास्ट की डिमांड की गयी है। उम्मीद है एक-दो दिन में प्रधानाध्यापकों और प्रधानों के बैंक खातों में मध्याह्न भोजन के लिए पैसा पहुंच जाएंगे।"




