Sonbhadra News : मलीन बस्ती के लोगों ने सदर विधायक को सौंपा ज्ञापन
नगर पंचायत डाला बाजार पर्वतीय के वार्ड नंबर दो स्थित हनुमान मंदिर परिसर में रविवार को दोपहर में मलीन बस्ती वासियों ने राबर्ट्सगंज सदर विधायक भूपेश चौबे को ज्ञापन सौंपा ।

sonbhadra
5:51 PM, March 15, 2026
मंटू शर्मा (संवाददाता)
डाला (सोनभद्र) । नगर पंचायत डाला बाजार पर्वतीय के वार्ड नंबर दो स्थित हनुमान मंदिर परिसर में रविवार को दोपहर में मलीन बस्ती वासियों ने राबर्ट्सगंज सदर विधायक भूपेश चौबे को ज्ञापन सौंपा ।
जहां मलीन बस्ती वासियों ने सदर विधायक को ज्ञापन के माध्यम से अवगत करवाते हुए बताया कि नगर पंचायत डाला बाजार पर्वतीय का दो और तीन वार्ड मलीन बस्ती के नाम से जाना जाता है जिसमें लगभग 60 वर्षों से आबाद है जिसमें झुग्गी झोपही कच्चा और पक्का मकान बनाकर रहते चले आ रहे हैं 500 घरों की घनी आबादी वाला बस्ती है लगभग 3000 परिवारों की संख्या है और लगभग 1552 से लोग रहते चले आ रहे हैं इसी दौरान कुछ लोगों के पास भूलेख के दस्तावेज थे उसी के आधार पर रहते चले आ रहे थे स्टेट सीमेंट यूनिट डाला व स्टेट सीमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की नीव लगभग 1965-66, के बीच में रखी गई इसी दौरान उक्त भूखंडों पर स्टेट सीमेंट यूनिट डाला व स्टेट सीमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों लिपिकों के माध्धाम से जिले के वर्तमान राजस्व के अधिकारियों के मिली भगत के कारण गाटा संख्या 113 व 179 जो कि वर्तमान में मलिन बस्ती डाला के नाम जानी जाती है। उक्त भूखंड की अभिलेख में लीपा पोती कर फर्जी तरीके से स्टेट सीमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के नाम दर्ज कर दिया गया और फैक्ट्री स्थापित हुई व कुछ साल बाद निर्भीकरण के विरोध में स्टेट सीमेंट कर्मचारियों द्वारा बड़े स्तर पर आंदोलन किया गया नतीजन 2 जून 1991 में पुलिस के द्वारा स्टेट सीमेंट कर्मचारियों और क्षेत्र वासियों व छात्रों पर बर्बरता पूर्वक लाठियां व गोलियां चलाई गई जिसमें एक छात्र और आठ कर्मचारियों की जान चली गई और सीमेंट फैक्ट्री बंद हो गया और क्षेत्र का विकास रुक गया लोगों के खाने के लाले पड़े थे बच्चों की पढ़ाई रुक गई लड़कियों की शादियां रुक गई डाला के बगल में क्रेशर उद्योग होने की वजह से स्टेट सीमेंट कर्मचारी व छात्र भूखे मरने की स्थिति में क्रेशर और खदान में मजदूरी कर परिवारों का पेट पालने लगे कुछ कर्मचारी की पैसों के अभाव में लंबी बीमारी के कारण मौते हो गई। इसी तरह दुखों के दौर में डाला वासियों का जीवन बदहाली के दौर में बीतता चला आ रहा था की फिर कर्मचारीयो पावनो के लिए आंदोलन व भूख हड़ताल करने के बाद 2006 में इलाहाबाद हाई कोर्ट लिक्विडेटर के द्वारा फैक्ट्री की नीलामी की गई जिसमें जेपी ग्रुप के द्वारा सीमेंट फैक्ट्री को खरीदा गया तदोपरांत स्टेट सीमेंट कर्मचारियों को आधा अधूरा बकाया वेतन का भुगतान देकर जबरन पुलिस फोर्स के द्वारा कर्मचारियों के आवंटित मकान को खाली करवाया गया लोगों को घर से बेघर किया गया इसी दौरान गाटा संख्या 113 व गाटा संख्या 179 पर लगभग 60 वर्षों से निवास कर रहे हैं लोगों को जेपी सीमेंट के इशारे पर पुलिस फोर्स द्वारा जबरन झोपड़ी व कच्चा व पक्का मकान बनाकर रह रहे लोगों को हटाया जाने लगा तब अपने हक अधिकार को जताते व बताते हुए मलिन बस्ती निवासियों के द्वारा माननीय सिविल कोर्ट सोनभद्र व उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अपने बचाव पक्ष में अपील दायर की गई लेकिन उक्त गाटा भूखंडों में अभिलेखीय गड़बड़ी के कारण व कुछ राजस्व अधिकारियों व कर्मचारी के मिली भगत के कारण बस्ती के खिलाफ फैसला आया लेकिन तत्कालीन जिलाधिकारी सोनभद्र श्री पंधारी यादव जी के द्वारा हाईकोर्ट में मलिन बस्ती की तरफ से मानवीय दृष्टिकोण से प्रार्थना पत्र दायर किया कि मलिन बस्ती के लोग जमीन घर छोड़ने से इनकार कर रहे हैं लगभग 60 वर्षों से आबाद बस्ती वासियों को जबरन खाली करना न्याय उचित नहीं होगा और कानून व्यवस्था खराब होगी इस तरह माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद का 2012 का बेदखली का आदेश यथा स्थिति में बना रहा समय यूं ही बीतता चला गया और
2016 में जेपी सीमेंट फैक्ट्री को अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी द्वारा खरीद लिया गया फिर अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के कोर्ट 2012 आदेश का हवाला देकर देते मलीन बस्ती निवासियों को हटाया जाना गैरसंवैधानिक होगा जबकि भारत के संविधान के अनुसार जीस जमीन पर 30 वर्ष व प्राइवेट जमीन पर 12 वर्ष तक निवास बनाकर रहता है संविधान की धारा 1963 अनुच्छेद 65 में साफ-सावर्णित है की कोई भी व्यक्ति के वारा अगर सरकारी भूखंड का मालिक माना जाता है या सरकार के दवारा मालिकाना दिया जाना उचित है। श्रीमान जी से विनमता पूर्वक आग्रह है कि उपरोक्त विषय की जांच बनाकर गंभीरता पूर्वक विचार कर 500 घर व 3000 परिवारों को करने का कष्ट करें अवगत कराया गया
जहां सदर विधायक भूपेश चौबे द्वारा यह आश्वासन देते हुए कहा कि यह मामला माननीय मुख्यमंत्री जी जब जिले आगमन हुआ था तभी यह मामला उनके संज्ञान में दिया गया है और इस ज्ञापन को भी मुख्यमंत्री जी तक पहुंचाते हुए निस्तारण करवा जाएगा और स्पष्ट रूप से कहा कि जो जहां बसा है वह वहीं रहेगा उसको हटने नहीं दिया जायेगा इसकी लडाई हम सब मिलकर लड़ेंगे।
इस दौरान लक्ष्मण कुशवाहा ओमप्रकाश तिवारी संतोष कुमार बबलू दीपक दुबे संदीप सिंह पटेल धीरेंद्र प्रताप सिंह मंगला प्रसाद जायसवाल पारसनाथ यादव पूनम देवी उमेश मेहता रामप्रवेश मेमता नागेंद्र पासवान अवनीश देव पांडेय बबूदर पाठक हरिश्चंद्र सिंह रफीक वारसी जगत यादव सुदर्शन पांडेय मदन अग्रहरि पिंटू साहनी विजय जयसवाल आदि सैकड़ों बस्ती बासी उपस्थित रहे



