Sonbhadra News : गौहत्या पर शंकराचार्य का तीखा प्रहार, बोले - भगवा पहनकर गाय कटवाने वालों को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गविष्टि यात्रा सोमवार को दुद्धी और ओबरा होते हुए रॉबर्ट्सगंज पहुंची, जहां पूर्व घोरावल विधायक रमेश दुबे के आवास पर उनका पारंपरिक स्वागत....

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8:46 PM, May 11, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• सोनभद्र में गविष्टि यात्रा के दौरान सरकार पर साधा निशाना, गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने की उठाई मांग
सोनभद्र । ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गविष्टि यात्रा सोमवार को दुद्धी और ओबरा होते हुए रॉबर्ट्सगंज पहुंची, जहां पूर्व घोरावल विधायक रमेश दुबे के आवास पर उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में जुटे लोगों के बीच शंकराचार्य ने गौहत्या, हिंदुत्व, राजनीति और केंद्र-प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर जमकर हमला बोला। उनके बयान पूरे कार्यक्रम के दौरान चर्चा का केंद्र बने रहे।
इस मौके पर सांसद छोटेलाल खरवार, सपा जिलाध्यक्ष रामनिहोर यादव, पूर्व सदर विधायक अविनाश कुशवाहा, कांग्रेस महिला सभा जिलाध्यक्ष ऊषा चौबे सहित कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां मौजूद रहीं। सभा में उपस्थित लोगों ने गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित किए जाने की मांग का समर्थन किया।
सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि देश में सनातन और हिंदुत्व के नाम पर लोगों की भावनाओं के साथ छल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग भगवा वस्त्र पहनकर सत्ता में बैठे हैं, वही गौहत्या को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि 'जो भगवा पहनकर गाय काटने का लाइसेंस दे, वह हिंदुओं की रक्षा नहीं कर सकता।'
उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में गौवंश की स्थिति पश्चिम बंगाल से भी अधिक खराब है। बंगाल में गौवंश बढ़ रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में लगातार गौहत्या हो रही है। जो सरकार खुद को हिंदुत्ववादी बताती है, वही करोड़ों गौमाताओं के कटान और विदेशों में व्यापार की जिम्मेदार है।
शंकराचार्य ने कहा कि उनकी गविष्टि यात्रा का उद्देश्य देशभर में गौ-संरक्षण को लेकर जनजागरण करना, गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाना और गौवध पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जनमत तैयार करना है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि जो राजनीतिक दल गौ-रक्षा की बात नहीं करते, उन्हें जनता सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाए।
उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष को गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करना चाहिए और विपक्ष को यह वादा करना चाहिए कि सत्ता में आने पर गौहत्या को गैरजमानती अपराध बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गाय की रक्षा नहीं कर सकता, उसे मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बनने का नैतिक अधिकार नहीं है।
शंकराचार्य ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि वर्तमान राजनीतिक दल गौ-रक्षा सुनिश्चित नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ी सनातनी विचारधारा के साथ सत्ता परिवर्तन करेगी। उन्होंने कहा कि “छद्म हिंदुत्व का विकल्प केवल सनातन धर्म है और आने वाले समय में देश में सनातन की राजनीति होगी।”
उन्होंने असम के मुख्यमंत्री के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ नेता खुलेआम गौ-हत्यारों के वोट की राजनीति कर रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों को गौ-रक्षा और सनातन परंपरा की रक्षा का संकल्प भी दिलाया।
इस दौरान शंकराचार्य ने रॉबर्ट्सगंज और घोरावल विधानसभा क्षेत्रों में ‘राम धाम गौशाला’ स्थापित करने का आह्वान किया। इसके लिए उन्होंने पूर्व सदर विधायक अविनाश कुशवाहा और पूर्व घोरावल विधायक रमेश दुबे को प्रतिनिधि नियुक्त किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि गौशाला निर्माण में हर व्यक्ति कम से कम एक नोट का सहयोग अवश्य करे।
मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देशवासियों से सोना न खरीदने, डीजल-पेट्रोल और खाद्य तेल का सीमित उपयोग करने तथा विदेशी यात्राओं पर रोक लगाने की अपील कर रहे हैं, जबकि स्वयं विदेश दौरे पर निकल गए हैं।
उन्होंने कहा कि जनता को त्याग और बचत का संदेश देने से पहले शासकों को खुद उसका पालन करना चाहिए। देश की जनता पहले ही महंगाई और आर्थिक बोझ से परेशान है। ऐसे समय में सरकार को राहत देने वाले फैसले लेने चाहिए, न कि केवल अपीलों के जरिए जिम्मेदारी जनता पर डालनी चाहिए।




