Sonbhadra News : देश की पहली महिला शिक्षिका थीं 'सावित्री बाई फुले', समाज से छुआछूत मिटाने के लिए लड़ी लंबी लड़ाई
आज छपका स्थित समाजवादी पार्टी जिला कार्यालय पर भारत में महिला शिक्षा की ज्योति जला महिला सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करने वाली महान समाज सेविका देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती....

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2:43 PM, January 3, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आज छपका स्थित समाजवादी पार्टी जिला कार्यालय पर भारत में महिला शिक्षा की ज्योति जला महिला सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करने वाली महान समाज सेविका देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई एवं उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव चौधरी यशवंत सिंह पटेल ने कहा कि "सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक थी जिन्होंने महिलाओं और दलितों की शिक्षा के लिए अभूतपूर्व कार्य किया। उन्होंने 1848 में पुणे में पहला बालिका विद्यालय खोला सत्यशोधक समाज की स्थापना की और बाल विवाह सती प्रथा व छुआछूत जैसी प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाई तथा विधवाओं के लिए आश्रय गृह भी स्थापित किया था। आज उनकी लड़ाई कोई पार्टी लड़ रही है तो वह समाजवादी पार्टी है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिलाओं की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ने का काम कर रहे है। जब से केंद्र एवं प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है तब से महिलाओं पर अत्याचार चरम सीमा पर है महिलाओं की दर्द को कोई सुनने वाला नहीं है।"
जिला महासचिव मो0 शईद कुरैशी ने बताया कि "सावित्रीबाई ने औरतों के हक के लिए बहुत लड़ाई लड़ी। उन्होंने सिर्फ औरतों के लिए ही नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी आवाज उठाई जिन्हें समाज में कमतर समझा जाता था। उन्होंने जाति-पाति, छुआछूत और विधवाओं के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ खड़े होकर बात की। सावित्रीबाई ने गरीबों और औरतों को पढ़ाने के लिए स्कूल खोले। उन्होंने लोगों को यह समझाना चाहा कि सब बराबर हैं और किसी को कम नहीं समझना चाहिए। सावित्रीबाई सिर्फ समाज सेवा करने वाली महिला ही नहीं थीं, बल्कि वे बहुत अच्छी कवि भी थीं। अपनी कविताओं के जरिए उन्होंने लोगों को समाज की बुराइयों के बारे में बताया।"
वहीं जिला उपाध्यक्ष अशोक पटेल ने बताया कि "कई घर वाले अपने बच्चों को पढ़ाई नहीं करने देते थे। सावित्रीबाई फुले चाहती थीं कि सभी बच्चे पढ़े-लिखें। इसलिए वे उन बच्चों को पैसे देती थीं जो स्कूल जाते थे। इससे बच्चों को पढ़ाई करने में मदद मिलती थी। सावित्रीबाई फुले चाहती थीं कि सभी लोग बराबर हों। उन्होंने लोगों को समझाया कि सभी लोग भाई-बहन की तरह हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि उन्हें अलग-अलग जातियों के लोगों से शादी करनी चाहिए। उन्होंने एक समूह बनाया जिसका नाम सत्यशोधक समाज था। इस समूह के लोग लोगों को समझाते थे कि सभी लोग बराबर हैं।"
इस दौरान अनिल प्रधान, नगर अध्यक्ष सरदार पारब्रह्म सिंह, इं0 अजीत मौर्य, रामनरेश बैसवार, हरिशंकर विश्वकर्मा, सूरज मिश्रा, कृष्ण कुमार, विनीत, सरोज, पीयूष यादव, राजनाथ यादव, संतोष चौहान सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।




