Sonbhadra News : सोन नदी पर 'बालू माफिया राज', निषाद समाज ने खनन विभाग पर संरक्षण देने के आरोप लगा किया प्रदर्शन
ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले सोनभद्र में एक बार फिर अवैध खनन का मुद्दा गरमा गया है। ओबरा तहसील क्षेत्र की सोन नदी में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध बालू खनन और भारी मशीनों के इस्तेमाल के......

अवैध खनन के विरुद्ध कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते निषाद समाज के लोग....
sonbhadra
6:44 PM, June 19, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• नदी को बांधकर हो रही बालू की लूट, मछुआरों और किसानों की रोजी पर डाका, कलेक्ट्रेट पहुंचा आक्रोश
सोनभद्र । ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले सोनभद्र में एक बार फिर अवैध खनन का मुद्दा गरमा गया है। ओबरा तहसील क्षेत्र की सोन नदी में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध बालू खनन और भारी मशीनों के इस्तेमाल के खिलाफ निषाद समाज एवं ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए ग्रामीणों ने खनन विभाग और संबंधित अधिकारियों पर खनन माफियाओं को खुला संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि सोन नदी की प्राकृतिक जलधारा को रोककर और नदी के बीचों-बीच बड़ी-बड़ी लिफ्टर मशीनें लगाकर बालू की लोडिंग की जा रही है। इससे न केवल नदी का स्वरूप बिगड़ रहा है बल्कि निषाद समाज की परंपरागत आजीविका भी संकट में पड़ गई है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रोहित बिंद ने बताया कि "नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि हजारों मछुआरों, किसानों और नाविक परिवारों की जीवनरेखा है। लेकिन बालू माफियाओं द्वारा नदी के बीचों-बीच बड़ी-बड़ी लिफ्टर मशीनें और जेसीबी उतारकर प्राकृतिक जलधारा को बाधित किया जा रहा है। नदी का सीना चीरकर की जा रही इस लूट से जहां पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, वहीं निषाद समाज की आजीविका भी बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि "वर्षों से जिले की बालू साइटों पर नियमों को ताक पर रखकर खनन किया जा रहा है। नदी को कृत्रिम रूप से बांधकर बालू निकाली जा रही है और भारी मशीनों से लोडिंग का काम हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खनन नियमावली नदी की मूल धारा से छेड़छाड़ की अनुमति नहीं देती, तो आखिर यह सब किसके संरक्षण में हो रहा है? उन्होंने कहा कि आज हालत यह है कि नदी में नाव चलाना मुश्किल हो गया है। जहां पहले निषाद समाज के लोग नाव से आवागमन करते थे, अब उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। खेती करने वाले किसानों के सामने भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।"
वहीं राजबली उर्फ सनी ने आरोप लगाया कि "अघोरी खनन क्षेत्र समेत कई बालू साइटों पर खुलेआम जेसीबी और लिफ्टर मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है। यदि नदी के बीच मशीनें चलाने की अनुमति नहीं है, तो फिर यह खेल किसकी शह पर चल रहा है? उन्होंने कहा कि यह केवल अवैध खनन नहीं, बल्कि नदी और उससे जुड़े हजारों परिवारों के अधिकारों की खुली लूट है। वहीं उन्होंने सवाल उठाया कि जब नदी के भीतर मशीनें चलाने की अनुमति ही नहीं है तो आखिर यह सब किसके इशारे पर हो रहा है?"
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि "खनन की अंधी दौड़ ने सोन नदी के जलीय जीवन को भी खतरे में डाल दिया है। मछलियां, कछुए और अन्य जलीय जीव बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे हैं। कई बार मृत जलीय जीव मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है।"




