Sonbhadra news : 13.64 लाख की आरओ टंकी बनी शोपीस, कागजों में दौड़ रहा पानी !
13,64,000 (तेरह लाख चौंसठ हजार रुपये) की लागत से करीब तीन महीने में तैयार कराई गई आरओ पानी टंकी इन दिनों लोगों के लिए महज शोपीस बनकर रह गई है।

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9:19 AM, September 13, 2026
राकेश चौबे
-- तीन महीने में तैयार हुई टंकी, धरातल पर बूंद नहीं; ग्रामीण बोले—फाइलों में चालू है सप्लाई
मारकुंडी (सोनभद्र)। चुर्क-गुरमा नगर पंचायत क्षेत्र के गुरमा रंगमंच के समीप ₹13,64,000 (तेरह लाख चौंसठ हजार रुपये) की लागत से करीब तीन महीने में तैयार कराई गई आरओ पानी टंकी इन दिनों लोगों के लिए महज शोपीस बनकर रह गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टंकी की पानी सप्लाई कागज और फाइलों में चालू दिखाई जा रही है, जबकि धरातल पर लोगों को एक बूंद पानी तक उपलब्ध नहीं हो रहा है।
बताया गया कि आरओ पानी टंकी का निर्माण पूरा होने के बाद बस्तीवासियों को उम्मीद थी कि उन्हें शुद्ध पेयजल की सुविधा मिलेगी। लेकिन तकनीकी समस्या के चलते वास्तविकता में टंकी से पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। लाखों रुपये की लागत और तीन महीने की निर्माण अवधि के बाद भी सुविधा का लाभ जनता को नहीं मिलना नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
कागजों में सप्लाई, जमीन पर सूखा सिस्टम
स्थानीय लोगों का कहना है कि फाइलों में पानी की सप्लाई चालू होने की बात कही जा रही है, लेकिन मौके पर टंकी और सप्लाई व्यवस्था की हकीकत कुछ और ही नजर आती है। बस्ती के लोगों को आज भी सरकारी हैंडपंप के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में हैंडपंप के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी लोगों में चिंता बनी हुई है।
वार्ड नंबर-2 के सभासद प्रतिनिधि मनोज कुमार समेत बस्ती के लोगों ने नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को समस्या से अवगत कराने की बात कही है। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया गया।
जनता का सवाल—13.64 लाख खर्च हुए तो पानी कहां है?
बस्तीवासियों का कहना है कि ₹13.64 लाख की लागत से तीन महीने में तैयार हुई टंकी अगर जमीन पर पानी नहीं दे रही है, तो आखिर इसका लाभ किसे मिल रहा है? लोगों ने टंकी की तकनीकी खराबी दूर कर तत्काल पानी की सप्लाई शुरू कराने तथा पूरे मामले की मौके पर जांच कराने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों में इस मामले को लेकर आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकारी धन से तैयार पेयजल सुविधा कागजी खानापूर्ति तक सीमित न रहकर धरातल पर जनता के काम आनी चाहिए।
अब देखने वाली बात यह है कि कागजों में दौड़ रही पानी की सप्लाई आखिर कब हकीकत में बस्ती के घरों तक पहुंचेगी।
उक्त सम्बंध में अधिशासी अधिकारी अमीत कुमार सरोज से जानकारी चाही तो फोन की पूरी घंटी जाने के बावजूद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।




