Sonbhadra News : भाजपा में बगावत बेकाबू! जिलाध्यक्ष पर सिद्धांतों से खिलवाड़ का आरोप, अंदरूनी कलह से मचा सियासी भूचाल

जिले में भाजपा संगठन इन दिनों अंदरूनी कलह से जूझता दिखाई दे रहा है। भाजपा का अंदरूनी विवाद अब सोशल मीडिया से निकलकर जमीनी स्तर पर नजर आने लगा है। जिलाध्यक्ष के खिलाफ उठ रहे विरोध के स्वर थमने.......

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7:00 PM, April 23, 2026

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । जिले में भाजपा संगठन इन दिनों अंदरूनी कलह से जूझता दिखाई दे रहा है। भाजपा का अंदरूनी विवाद अब सोशल मीडिया से निकलकर जमीनी स्तर पर नजर आने लगा है। जिलाध्यक्ष के खिलाफ उठ रहे विरोध के स्वर थमने के बजाय और तीखे हो गए हैं, जिससे संगठन में गहराती दरारें अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच गई हैं। एक तरफ जहां कई बूथ अध्यक्षों ने जिलाध्यक्ष पर अभद्रता और उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर इस्तीफों की झड़ी लगा दी, वहीं दूसरी ओर नई जिला कमेटी के गठन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और खुलकर सामने आ गया है। नई कमेटी को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर नाराजगी जताई है और आरोप लगाया है कि संगठन की रीत, नीति और सिद्धांतों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए मनमाने तरीके से पदों का बंटवारा किया गया है।

इसी मुद्दे को लेकर आज बरैला महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित गौरी शंकर मंडल की बैठक में माहौल गरमा गया। बैठक में भाजपा किसान मोर्चा के महामंत्री नार सिंह पटेल और पिछड़ा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह पटेल बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे। बैठक में वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा, संगठन में पक्षपात और मनमानी को लेकर तीखे हमला बोला।

भाजपा किसान मोर्चा के महामंत्री नार सिंह पटेल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि "जिलाध्यक्ष की कार्यशैली पार्टी की मूल आत्मा के बिल्कुल विपरीत चल रही है। संगठन की नीति, नियम और सिद्धांतों को दरकिनार कर मनमानी तरीके से पदों का बंटवारा किया जा रहा है, जो सीधे-सीधे कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ रहा है। कुछ लोगों को एक साथ तीन-तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देना न केवल अनुचित है, बल्कि यह समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय भी है। सबसे गंभीर बात यह है कि बाहर से आए लोगों को तरजीह देकर वर्षों से पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और ऐसी स्थिति तो बगैर आर्थिक लाभ के हो ही नहीं सकती। अगर यही स्थिति रही तो इसका सीधा असर आने वाले विधानसभा चुनाव में दिखाई देगा और संगठन को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।"

वहीं पिछड़ा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह पटेल ने भी जिलाध्यक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "कार्यकर्ता पार्टी की रीढ़ होता है और वही सबसे ज्यादा उपेक्षित महसूस कर रहा है। जब एक समर्पित कार्यकर्ता को सम्मान और सुनवाई नहीं मिलेगी, तो वह आखिर कब तक पार्टी का झंडा उठाकर चलेगा? जिलाध्यक्ष के कार्यकाल में चुनावी हारों की लंबी फेहरिस्त खुद इस बात का प्रमाण है कि जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने का क्या परिणाम होता है। यहां तक कि दुद्धी उपचुनाव में अपने ही बूथ पर हार जाना उनकी कार्यकुशलता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। यदि जिलाध्यक्ष ने अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार नहीं किया और नई कमेटी में संतुलन नहीं बनाया, तो अभी जो असंतोष दिख रहा है, वह जल्द ही बड़े पैमाने पर टूट में बदल सकता है और इसका खामियाजा पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।"

इस दौरान डॉ0 विमलेश पटेल, सुरेश सिंह पटेल, महेंद्र सिंह पटेल, सुनील सिंह पटेल, छोटू पटेल, नीरज पटेल, अभिषेक बहादुर सिंह, विनोद सिंह पटेल, झिमल पटेल सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

"जिले में भाजपा के भीतर उभर रहा यह असंतोष अब महज नाराजगी नहीं, बल्कि एक संगठित असंतुलन की चेतावनी बन चुका है। जिस तरह से कार्यकर्ता खुलकर सामने आ रहे हैं, इस्तीफे दे रहे हैं और वरिष्ठ नेता सार्वजनिक मंचों से नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं, उससे साफ है कि मामला अब नियंत्रण के दायरे से बाहर जाता दिख रहा है। यदि समय रहते हालात नहीं संभाले गए, तो यह अंदरूनी कलह आने वाले चुनावी समीकरणों पर भारी पड़ सकती है और पार्टी को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।"

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