Sonbhadra News : मौत का तालाब बना राम सरोवर, 15 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद निकला मैकेनिक का शव, परिजनों में कोहराम
नगर के बीचों-बीच स्थित राम सरोवर तालाब एक बार फिर मौत का गवाह बन गया। बुधवार सुबह तालाब में डूबे 50 वर्षीय अधेड़ का शव करीब 15 घंटे बाद देर रात बरामद किया गया। दिनभर पुलिस, फायर ब्रिगेड और गोताखोरो...

रामसरोवर तालाब हादसे के बाद मौके पर जारी राहत बचाव कार्य.....
sonbhadra
11:41 AM, June 4, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• रामसरोवर तालाब किनारे सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
• स्थानीय निवासियों ने देसी शराब की दुकान को भी बताया तालाब में होने वाले हादसों के लिए जिम्मेदार
सोनभद्र । नगर के बीचों-बीच स्थित राम सरोवर तालाब एक बार फिर मौत का गवाह बन गया। बुधवार सुबह तालाब में डूबे 50 वर्षीय अधेड़ का शव करीब 15 घंटे बाद देर रात बरामद किया गया। मृतक पेशे से मोटर मैकेनिक है। वहीं दिनभर पुलिस, फायर ब्रिगेड और गोताखोरों की टीम तालाब की गहराइयों में जिंदगी की तलाश करती रही, लेकिन जब तक सफलता मिली तब तक बहुत देर हो चुकी थी। शव के बाहर आते ही परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया।
अंबेडकर नगर निवासी विमलेश पुत्र रामनाथ बुधवार सुबह करीब 10 बजे राम सरोवर तालाब के किनारे बैठे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह मछली पकड़ने के लिए तालाब में उतरे थे, लेकिन कुछ ही देर बाद गहरे पानी में समा गए और देखते ही देखते लापता हो गए। सूचना मिलते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग उन्हें बचाने के लिए दौड़े, लेकिन तब तक वह आंखों से ओझल हो चुके थे। वहीं घटना की सूचना पर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू कराया। वहीं घटना की सूचना पाकर सपा के पूर्व सदर विधायक अविनाश कुशवाहा और जिला सचिव प्रमोद यादव भी घटना स्थल पर पहुंच गए। वहीं स्थानीय लोगों की कोशिशें नाकाम होने के बाद पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा के हस्तक्षेप के बाद घटना के पांच घंटे बाद चोपन से पांच गोताखोरों की टीम बुलाई गई। फायर ब्रिगेड के जवानों ने भी घंटों तक तालाब में सर्च ऑपरेशन चलाया। पूरे दिन चले अभियान के बाद भी कोई सफलता नहीं मिली। आखिरकार देर रात तालाब की गहराई से शव बरामद हुआ।
इस हादसे के बाद लोगों का गुस्सा नगर पालिका प्रशासन और जिम्मेदार विभागों पर फूट पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि राम सरोवर में डूबने की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। इसके बावजूद आज तक तालाब के चारों ओर मजबूत सुरक्षा घेरा, रेलिंग, चेतावनी बोर्ड या निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। करोड़ों रुपये सौंदर्यीकरण पर खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए बुनियादी सुरक्षा तक उपलब्ध नहीं कराई गई।
सबसे बड़ा सवाल तालाब के ठीक सामने संचालित देसी शराब की दुकान को लेकर भी उठ रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शराब की दुकान के कारण अक्सर लोग तालाब किनारे बैठकर शराब का सेवन करते हैं, जिससे हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में गंभीर है तो सबसे पहले इस शराब की दुकान को वहां से हटाया जाए और तालाब क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किया जाए।




