Sonbhadra News : PWD बना ‘लूट का अड्डा’? बोगस फर्मों के सहारे करोड़ों की हेराफेरी का आरोप, अब नवागत डीएम के एक्शन पर टिकी नजर
जिला स्तरीय अधिकारियों से लेकर प्रदेश सरकार तक विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सोनभद्र की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। सड़क निर्माण में घटिया गुणवत्ता हो या टेंडर.....

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9:25 AM, May 4, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिला स्तरीय अधिकारियों से लेकर प्रदेश सरकार तक विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सोनभद्र की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। सड़क निर्माण में घटिया गुणवत्ता हो या टेंडर के नाम पर चल रहे 'सेटिंग का खेल' जनपद में लोक निर्माण विभाग (PWD) पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि विभाग के भीतर रिश्तेदारों और चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए बोगस फर्मों का जाल बिछाकर करोड़ों रुपये का सुनियोजित बंदरबांट किया जा रहा है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं मानो विकास कार्य नहीं, बल्कि 'सिस्टमेटिक लूटकांड' की पटकथा लिखी जा रही हो। ऐसे में नवागत जिलाधिकारी चर्चित गोंड के पदभार ग्रहण करने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके सख्त रुख ने जनपदवासियों में नई उम्मीद जगा दी है। लोगों को भरोसा है कि अब भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुके PWD विभाग की जांच कर दोषियों के खिलाफ बड़ी और सख्त कार्रवाई की जाएगी जिससे विकास के नाम पर चल रहे इस कथित खेल पर रोक लग सके।
लोक निर्माण विभाग पर सीधे प्रहार करते हुए पूर्वांचल नव निर्माण मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र पाण्डेय ने विभागीय तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उनका आरोप है कि प्रांतीय खंड में बोगस फर्मों के नाम पर फर्जी भुगतान कर सरकारी धन को सुनियोजित तरीके से लूटा जा रहा है। गिरीश पाण्डेय ने दावा किया है कि विभाग के अधिकारी नियमों को दरकिनार कर अपने करीबी ठेकेदारों और रिश्तेदारों को काम आवंटित करते हैं, और फिर उन्हीं कार्यों के नाम पर वास्तविक लागत से कई गुना अधिक भुगतान कर खजाने को चूना लगाया जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है। पहले से तय फर्मों को काम देने के लिए पूरी प्रक्रिया को मैनेज किया जाता है, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
गिरीश पाण्डेय ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल के माध्यम से जिलाधिकारी से वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुए टेंडर, कराए गए कार्यों और उनके सापेक्ष किए गए भुगतानों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर ईमानदारी से जांच कराई गई तो करोड़ों के घोटाले का काला सच उजागर होगा और कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।




