Sonbhadra News : जनता बेहाल, सरकार मालामाल, गैस सिलेंडर के दामों पर मचा बवाल
वोटों की राजनीति खत्म, तो राहत भी खत्म और अब महंगाई का ऐसा वार किया गया है जिसने रसोई से लेकर सड़क किनारे की थाली तक को झकझोर दिया है।

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8:22 PM, May 2, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । बंगाल सहित कई राज्यों के चुनाव खत्म होते ही सरकार ने आम जनता की जेब पर सीधा हमला बोल दिया है। वोटों की राजनीति खत्म, तो राहत भी खत्म और अब महंगाई का ऐसा वार किया गया है जिसने रसोई से लेकर सड़क किनारे की थाली तक को झकझोर दिया है। कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने साफ कर दिया है कि सत्ता की प्राथमिकता जनता नहीं, बल्कि सिर्फ चुनाव है।
बाहर खाना खाने वालों और स्ट्रीट फूड के शौकीनों को बड़ा झटका लगा है। 1 मई 2026 से कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर में ₹993 और 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर में ₹261 की बढ़ोतरी ने छोटे व्यापारियों से लेकर आम आदमी तक की कमर तोड़ दी है।
सोनभद्र में 1 अप्रैल तक ₹2078.50 में मिलने वाला 19 किलो का सिलेंडर अब ₹3071.50 तक पहुंच गया है। वहीं 5 किलो वाला सिलेंडर ₹549 से बढ़कर ₹810 हो गया है। हालांकि घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन बाजार और होटल इंडस्ट्री पर इसका असर साफ दिखने लगा है।
बढ़ती महंगाई को लेकर जनपद सोनभद्र में अब चट्टी-चौराहों पर भी गहमागहमी तेज हो गई है। हर नुक्कड़, हर चाय की दुकान पर बस एक ही चर्चा हो रही है कि आखिर ये महंगाई कब रुकेगी? चाय की चुस्कियों के साथ लोग सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में अब चाय की चुस्की भी भारी पड़ेगी और समोसे का स्वाद भी महंगा होगा। ढाबों, होटलों और ठेलों पर मिलने वाला सस्ता खाना अब गरीब की पहुंच से बाहर जाने लगा है। शादी-ब्याह से लेकर छोटे आयोजनों तक का खर्च बढ़ना तय है। सबसे बड़ा झटका उन मजदूरों, रिक्शा चालकों और दिहाड़ी कामगारों को लगेगा, जिनकी रोज की जिंदगी बाहर के सस्ते खाने पर टिकी होती है। ऐसे में रिक्शा चालक से लेकर छोटे दुकानदार तक सभी के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही है। लोगों का कहना है कि जब कमाई जस की तस है और खर्च लगातार बढ़ रहा है, तो आखिर आम आदमी जिए तो कैसे? अब यह मुद्दा सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर चट्टी-चौराहे की बहस का सबसे बड़ा विषय बन चुका है।
वहीं सपा के पूर्व घोरावल विधायक रमेश दुबे ने बताया कि "सरकार चुनाव के समय महंगाई छिपाती है और चुनाव खत्म होते ही जनता पर बोझ डाल देती है। यह ‘वोट के बाद चोट’ वाली नीति है। पिछले चार महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹1518 तक महंगा हो गया है। यह सरकार उद्योगपतियों की हितैषी और गरीबों की विरोधी बन चुकी है। गरीब, मजदूर और छोटे व्यापारी अब सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। क्या आम आदमी सिर्फ वोट देने तक ही याद रहता है?”
महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष ऊषा चौबे ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "यह सिर्फ गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाने का फैसला नहीं, बल्कि देश की महिलाओं और गरीब परिवारों की रसोई पर सीधा हमला है। चुनाव के समय महंगाई छुपाकर जनता को गुमराह किया गया और अब वोट खत्म होते ही उनकी थाली पर डाका डाला जा रहा है। जो महिलाएं घर चलाने के लिए हर दिन जद्दोजहद करती हैं, उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी गई हैं। यह सरकार ‘सशक्तिकरण’ की बात करती है, लेकिन असल में महिलाओं को महंगाई के बोझ तले दबा रही है। हम इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ेंगे क्योंकि यह सिर्फ महंगाई नहीं, बल्कि आम आदमी के सम्मान और अधिकारों पर हमला है।"
ऐसे में अब मामला सिर्फ गैस सिलेंडर की कीमतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उस भरोसे पर आकर टिक गया है जिसे हर चुनाव में बड़े-बड़े वादों के साथ जनता से मांगा जाता है। अगर हर बार चुनाव खत्म होते ही महंगाई का पहिया तेज कर दिया जाता है, तो यह सिर्फ जेब पर डाका नहीं बल्कि भरोसे पर भी डाका है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता सिर्फ चुनावी मौसम में याद की जाने वाली भीड़ है, या फिर उसकी रोजमर्रा की तकलीफों की भी कोई कीमत है?




