Sonbhadra news : सलखन सब स्टेशन की बदहाली पर भड़का जनाक्रोश, 6 से 8 घंटे बिजली से बेहाल ग्रामीण
सलखन विद्युत सब स्टेशन की बदहाल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

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6:34 PM, September 15, 2026
राकेश चौबे
मारकुंडी, (सोनभद्र)। बिजली उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखने वाला सोनभद्र जिले का ग्रामीण क्षेत्र इन दिनों बिजली संकट से जूझ रहा है। सलखन विद्युत सब स्टेशन की बदहाल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सलखन सब स्टेशन से ही मारकुंडी और गुरमा क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति की जाती है, लेकिन लगातार अघोषित कटौती, बार-बार ट्रिपिंग और फाल्ट के चलते ग्रामीणों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक दिन-रात मिलाकर मुश्किल से 6 से 8 घंटे ही बिजली मिल पा रही है, वह भी नियमित रूप से नहीं। कुछ समय के लिए आपूर्ति शुरू होने के बाद दोबारा ट्रिपिंग होने से स्थिति और खराब हो जाती है। बिजली आने-जाने का कोई निश्चित समय निर्धारित न होने से उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सलखन सब स्टेशन से अलग-अलग फीडरों से होती है आपूर्ति
ग्रामीणों के अनुसार सलखन सब स्टेशन से ही क्षेत्र में अलग-अलग फीडरों के माध्यम से विद्युत आपूर्ति की जाती है। मारकुंडी क्षेत्र के लिए अलग आपूर्ति व्यवस्था है, जबकि गुरमा क्षेत्र के लिए अलग फीडर से बिजली जाती है। दोनों ही आपूर्ति सलखन सब स्टेशन से जुड़ी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि फीडरों पर बार-बार ट्रिपिंग और फाल्ट के कारण पूरे क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था प्रभावित हो रही है। लंबे समय तक बिजली गुल रहने के कारण लोगों में विभागीय व्यवस्था के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
गर्मी में पंखे-कूलर बंद, बच्चे और बुजुर्ग परेशान
भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली कटौती ने घरेलू उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पंखे और कूलर बंद रहने से घरों में रहना मुश्किल हो रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को उठानी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की समस्या अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। रात में अचानक बिजली गुल होने के बाद घंटों इंतजार करना पड़ता है और आपूर्ति आने के बाद भी बार-बार ट्रिपिंग से राहत नहीं मिलती।
पेयजल और सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित
विद्युत कटौती का असर पेयजल और खेती-किसानी पर भी पड़ रहा है। बिजली नहीं रहने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित होती है, वहीं किसान सिंचाई के लिए बिजली आने का इंतजार करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक कई किसान रात के समय खेतों में बिजली आने की उम्मीद में घंटों जागते रहते हैं। अनियमित आपूर्ति के कारण सिंचाई का काम प्रभावित होने से खेती पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
छोटे कारोबारियों की भी बढ़ी मुश्किलें
बिजली संकट का असर स्थानीय बाजार और छोटे कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है। बिजली पर निर्भर दुकानदारों और अन्य व्यवसायियों का काम बार-बार बाधित हो रहा है। इससे कारोबार और रोजाना की आमदनी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कटौती अब केवल घरेलू परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह पेयजल, खेती और रोजगार से जुड़ी समस्या बन चुकी है।
प्रधान बोले—दिन में 15 से 20 बार कट रही बिजली
ग्राम पंचायत मारकुंडी के ग्राम प्रधान उधम सिंह यादव ने विद्युत व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मारकुंडी और आसपास के क्षेत्रों में बिजली की स्थिति बेहद खराब है। उनके मुताबिक दिन में कई बार बिजली कट जाती है और आपूर्ति बहाल होने के बाद भी लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है।
प्रधान ने कहा कि विद्युत विभाग के जेई, एसडीओ और अधीक्षण अभियंता स्तर के अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। किसानों को सिंचाई के लिए रात-रातभर बिजली आने का इंतजार करना पड़ता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द विद्युत व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।
बहानों से नहीं चलेगा काम, व्यवस्था सुधारने की मांग
ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग की ओर से कभी फाल्ट, कभी ट्रिपिंग, कभी रोस्टिंग तो कभी अन्य तकनीकी कारण बताकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कारण चाहे जो भी हो, उपभोक्ताओं को नियमित बिजली मिलना विभाग की जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से सलखन सब स्टेशन और उससे जुड़े फीडरों की तकनीकी जांच कराने, बार-बार होने वाली ट्रिपिंग और फाल्ट की समस्या दूर करने तथा नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब सवाल व्यवस्था पर है
बिजली उत्पादन में अग्रणी सोनभद्र के ग्रामीण क्षेत्रों में यदि उपभोक्ताओं को प्रतिदिन महज 6 से 8 घंटे अनियमित बिजली मिल रही है तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें बार-बार शिकायत और आश्वासन नहीं, बल्कि सलखन सब स्टेशन की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में स्थायी सुधार चाहिए।
अब सवाल यह है कि सलखन सब स्टेशन की बदहाल विद्युत व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या कागजी रिपोर्टों से ही व्यवस्था दुरुस्त मानी जाएगी या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखेंगे? ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए बार-बार गुहार लगाना उनकी मजबूरी नहीं होनी चाहिए।




