Sonbhadra news : झोलाछाप डॉक्टरों के शरण में गरीब
जहां एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लोगों को सरकारी अस्पताल जाने के लिए प्रेरित करती है वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग धड़ल्ले से प्राइवेट नर्सिंग होम को लाइसेंस भी जारी कर रहा है।

sonbbadra
6:49 PM, September 22, 2026
राकेश चौबे
० सस्ते इलाज के चक्कर में फंसते हैं गरीब
० गरीबों की जिंदगी के साथ हो रहा खिलवाड़
० झोलाछाप डॉक्टरों के लिए नियुक्त हैं नोडल अधिकारी
मारकुंडी (सोनभद्र)। जहां एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लोगों को सरकारी अस्पताल जाने के लिए प्रेरित करती है वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग धड़ल्ले से प्राइवेट नर्सिंग होम को लाइसेंस भी जारी कर रहा है। प्राइवेट नर्सिंगहोम में जिस तरह से पिछले कुछ महीनों में कई बड़ी घटनाएं घट चुकी हैं उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अवैध अस्पतालों पर नकेल नहीं लगा सका है। किसी घटना के समय स्वास्थ्य विभाग कुछ दिनों तक सक्रिय रहता है फिर स्थिति वही ढाक के तीन पात वाली हो जाती है। इन दिनों मौसम में बदलाव के साथ सर्दी, जुकाम बुखार और खाँसी जैसी बीमारी का प्रकोप बढ़ गया है। ऐसे में दूर दराज में रहने वाले गरीब अस्पताल न जाकर झोलाछाप डॉक्टरों के शरण में चले जा रहे हैं जिससे उनकी बीमारी तो ठीक नहीं हो रही है बल्कि पैसे का दोहन जरूर हो जा रहा है । ऐसे ही सलखन क्षेत्र के मकरीबारी, मीना बाजार, बेलछ, रुदौली, सलखन, पटवध, कुरूहुल, मीतापुर, करगरा, रजधन और मारकुंडी समेत कई गाँव के लोग सलखन स्वास्थ्य केंद्र हो या फिर मेडिकल कालेज नहीं पहुँच पा रहे और सस्ते इलाज के चक्कर में झोलाछाप के झांसे में फंस जा रहे हैं ।
बड़ा सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य विभाग में झोलाछाप डॉक्टरों की चेकिंग के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त हैं तो आखिर जिले में झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम कैसे अपनी दुकान चला रहे हैं।
सवाल तो यह भी है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग किसी घटना के बाद ही क्यों जागता है, पहले अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाता ।
बहरहाल अब देखना है कि अवैध रूप से चल रहे अस्पताल और झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही किसी घटना के बाद होती है या फिर पहले होगी।




