Sonbhadra News : मधुरिमा साहित्य गोष्ठी में कवियों की कविताओं ने लूटी वाहवाही
हिन्दी साहित्य के अनुपम अनुष्ठान हेतु देश के शीर्ष मंचों में शुमार मधुरिमा साहित्य गोष्ठी का 62वां अखिल भारतीय कवि सम्मेलन अपने अतीत की सुनहरी यादों को समेटे वर्तमान के साथ चलते हुए भविष्य की इबा.....

मधुरिमा साहित्य गोष्ठी में काव्य पाठ करते कवि
sonbhadra
10:33 PM, January 3, 2025
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । हिन्दी साहित्य के अनुपम अनुष्ठान हेतु देश के शीर्ष मंचों में शुमार मधुरिमा साहित्य गोष्ठी का 62वां अखिल भारतीय कवि सम्मेलन अपने अतीत की सुनहरी यादों को समेटे वर्तमान के साथ चलते हुए भविष्य की इबारत लिखने के संकल्प के साथ आयोजन को यादगार बनाते हुए साहित्य प्रेमियों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ गया।
संस्था के निदेशक देश के लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकार चिंतक नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष पं0 अजय शेखर संयोजन व सदर विधायक भूपेश चौबे के मुख्य आतिथ्य में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की अध्यक्षता उ0प्र0 चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक साहित्यकार डॉ0 अनिल मिश्र व संचालन कवि नागेश सांडिल्य ने किया।
सर्द मौसम में साहित्य निशां की सुनहरी शाम के साक्षी बने श्रोताओं की मौजूदगी से राबर्ट्सगंज का आरटीएस क्लब ठहाकों और तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजयमान रहा देश के विभिन्न हिस्सों से आये साहित्य साधकों के स्वागत व माल्यार्पण के पश्चात कुमारी श्रीजा व जाने माने गीतकार जगदीश पंथी के वाणी वन्दना की प्रस्तुति श्वेत वसने मां तुम कहां हो, एक बार फिर वीणा बजा दो से कार्यक्रम का आगाज किया गया।
कभी कभी भुला सा सब कुछ याद बहुत आता है, वक्त गुजर जाता है जैसे गीतों को गुनगुनाते हुए नोएडा से आये देश के श्रेष्ठ गीतकार डॉ0 सुरेश ने राबर्ट्सगंन से अपने चार दशक पूर्व जुड़े अपने रिश्ते को तरोताजा करते हुए सोने के दिन चांदी के दिन आये गए आंधी के दिन सुनाकर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। चंदौली के आये गीतकार मनोज द्विवेदी 'मधुर' मैं जमाने के नजरों में नाकाम हुँ, क्योंकि हमने किसी को छला ही नही और सोनभद्र की जानी मानी कवियित्री रचना तिवारी ने मौत जी गए तुम्हारे बिन, सांस सांस जख्म कर गयी गीत गुन गुनाते हुए आयोजन को खुशनुमा बना दिया।
बलिया से आये भोजपुरी भूषण डॉ0 नन्द जी नंदा ने लीले खातिर तोहके मिलल आजादी, इहे राष्ट्रभक्ति सही आचरण ह सुनाकर व्यस्था पर करारा प्रहार किया तो वाराणसी से आये कवि डॉ0 धर्म प्रकाश मिश्र ने त्रेता वाला गिद्ध सीता माता हेतु जान दिया, कलयुग के गिद्ध सीताओं को नोच खाते है गजलकार अब्दुल हई अच्छा हुआ जो आप बेगाने हो गए, नाहक ही इश्क में कई अफ़साने हो गए और शायर अशोक तिवारी ने जुबां से तल्ख मगर दिल से बहुत सच्चा है, हवेलियों के दरमियाँ उसका मकान कच्चा है सुनाकर तालियां बटोरी।




