उन्होंने कहा कि आज इस पवित्र भूमि सोनभद्र पर आकर, आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत हर्ष और गौरव की अनुभूति हो रही है, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मैं सोनभद्र की पवित्र धरती पर उपस्थित हुँ- एक ऐसा जिला जो समृद्ध जनजातीय विरासत और अटूट आत्मबल का प्रतीक है। आज का यह अवसर केवल उत्सव का नहीं, बल्कि जनजातीय सशक्तिकरण के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराने का है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी सरकार के उस संकल्प का प्रतीक है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास‘ और सबका प्रयास के मूल मंत्र पर आधारित है। आज हम यहाँ ‘धरती आबा जनभागीदारी अभियान‘ के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़े हैं, जहाँ हम अपने जनजातीय समाज के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए मिलकर काम करने का संकल्प दोहरा रहे हैं। धरती आबा जनभागीदारी अभियान आजादी के बाद का सबसे बड़ा जनजातीय सशक्तिकरण अभियान हैं, यह अभियान 15 जून 2025 को प्रारंभ हुआ और 14 जुलाई 2025 को आज परिवर्तन की ऐतिहासिक गाथा रची गई। इस अभियान में 520़ जनजातीय बहुल जिले, 2700़ विकास खंड, 52,000़ ग्राम स्तरीय शिविर, 1.36 करोड़, जनजातीय नागरिकों की भागीदारी, प्रत्यक्ष लाभ दृ जनजातीय नागरिकों तक पहुंचा शासन, 11.5 लाख, आधार नामांकन/संशोधन,9.5 ला, आयुष्मान भारत कार्ड जारी, 3.8 लाख, नए जनधन खाते खोले गए, 4.2 लाख किसान लाभान्वित (पीएम किसान), 7.37 लाख, सिकल सेल रोग की स्क्रीनिंग, 30 दिनों में वह कार्य हुआ जो पहले वर्षों में होता था। उन्होंने कहा कि जब हम जनजातीय समाज के उत्थान की बात करते हैं, तो हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और उनके अटूट संकल्प को याद करना होगा। प्रधानमंत्री ने हमेशा जनजातीय समुदायों को देश के विकास की मुख्यधारा में लाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि जनजातीय समाज केवल लाभार्थी न रहे, बल्कि राष्ट्र निर्माण में एक सक्रिय भागीदार बने, उनका मानना है कि जनजातीय का गौरव ही राष्ट्र गौरव है। इसी सोच के साथ, हमारी सरकार ने जनजातीय कल्याण के लिए कई अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनधन), जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, देश के सबसे वंचित और दूरस्थ जनजातीय समूहों, विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। यह अभियान उन लाखों भाई-बहनों के जीवन में बदलाव लाने के लिए शुरू किया गया है, जो दशकों से विकास की दौड़ में पीछे छूट गए थे। प्रधानमंत्री ने स्वयं इस अभियान की शुरुआत की और यह सुनिश्चित किया कि सरकार की हर योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। पीएम जनधन के तहत, हम शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सड़क संपर्क, सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, और आजीविका के अवसरों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस अभियान का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के हर कोने में रहने वाले हमारे जनजातीय भाई-बहनों को भी वे सभी मूलभूत सुविधाएँ मिलें, जो किसी भी अन्य नागरिक को मिलती हैं। यह केवल सरकारी योजनाएँ पहुँचाना नहीं है, बल्कि उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाना, उन्हें सम्मानजनक जीवन देना और उन्हें सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि बजट में वृद्धि, व पिछले एक दशक में मंत्रालय का बजट 4,000 करोड़ 12,000 करोड़ तक बढ़ चुका है, योजनाओं में शिक्षा में क्रांति, 476़ एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, 30 लाख, छात्रवृत्तियाँ प्रतिवर्ष व एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय यह हमारी सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। देश भर में दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त एकलव्य विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के अवसर भी प्रदान किए जा रहे हैं।