Sonbhadra News : ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ का संकल्प, जनजागरूकता कार्यक्रम में दी गई कानूनी जानकारी

अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर जिला अस्पताल परिसर में "बाल विवाह मुक्त भारत योजना" के अंतर्गत वृहद जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़......

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5:24 PM, April 22, 2026

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर जिला अस्पताल परिसर में "बाल विवाह मुक्त भारत योजना" के अंतर्गत वृहद जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करना तथा महिलाओं और बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना रहा।

परियोजना समन्वयक मुकेश कुमार सिंह के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आम नागरिक, अस्पताल कर्मी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि "बाल विवाह मुक्त भारत योजना" केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश को बाल विवाह की कुप्रथा से पूरी तरह मुक्त करना है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत ग्राम स्तर तक निगरानी समितियों का गठन किया जा रहा है और विभिन्न संस्थानों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। विशेष रूप से अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर प्रशासन सतर्क रहता है, क्योंकि इस दिन बाल विवाह के मामले अधिक सामने आते हैं।

कार्यक्रम में बाल श्रम उन्मूलन और शिक्षा के अधिकार से जुड़ी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से कार्य कराना दंडनीय अपराध है, वहीं 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। अभिभावकों से अपील की गई कि वे बच्चों को विद्यालय भेजें और बाल श्रम की सूचना तत्काल संबंधित हेल्पलाइन पर दें।

बाल कल्याण समिति के सदस्य अमित सिंह चंदेल ने “बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006” की जानकारी देते हुए बताया कि "लड़कियों की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाबालिग का विवाह कराना, उसमें सहयोग देना या उसे बढ़ावा देना कानूनन अपराध है, जिसके लिए दोषियों को दो वर्ष तक के कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बाल विवाह की जानकारी होने पर चुप न रहें, बल्कि तुरंत इसकी सूचना संबंधित विभाग को दें।"

इस अवसर पर चाइल्ड हेल्पलाइन टीम की सीमा शर्मा, सुधा गिरी, सत्यम चौरसिया, अंशु गिरी, अनिल यादव सहित स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने बाल विवाह मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में नागरिकों को आपातकालीन सहायता के लिए विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई, जिसमें 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन), 112 (आपातकालीन सेवा), 1090 (वीमेन पावर लाइन) और 1076 (मुख्यमंत्री हेल्पलाइन) शामिल हैं। लोगों से अपील की गई कि बाल विवाह या बाल श्रम से जुड़ी किसी भी सूचना को तुरंत इन नंबरों पर साझा करें, उनकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

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