Sonbhadra News : अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरो पर जिम्मेदार ही मेहरबान, जाँच व कार्यवाही के नाम पर करते हैं महज खानापूर्ति
स्थानीय नगर में बगैर रेडियोलाजिस्ट के प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्र धड़ल्ले से फल-फूल रहे हैं। संचालकों की ओर से संचालन की गाइड लाइन की अवहेलना किए जाने के मामले में कार्रवाई होती नहीं दिख रही है.....

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11:24 PM, September 25, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• अप्रशिक्षित लोगों के हाथों में अल्ट्रासाउंड सेंटर की कमान, मरीज हलकान
सोनभद्र । स्थानीय नगर में बगैर रेडियोलाजिस्ट के प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्र धड़ल्ले से फल-फूल रहे हैं। संचालकों की ओर से संचालन की गाइड लाइन की अवहेलना किए जाने के मामले में कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तमाम दावा महज हवा-हवाई ही साबित हो रहा है।
अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालकों के पास रेडियोलाजिस्ट की डिग्री होने के साथ एक प्रशिक्षित महिला की उपस्थिति अनिवार्य होती है। लेकिन जिले में इसका पालन नाममात्र केंद्रों पर होता दिख रहा है। स्वास्थ्य विभाग की कृपा से बेरोकटोक चल रहे गोरखधंधे से अयोग्य संचालक मालामाल हो रहे हैं तो जांच रिपोर्ट सही न होने से जनता के जीवन को खतरा पैदा कर रहे हैं। एक ओर सरकार जनता के स्वास्थ्य और बीमारियों से सुरक्षा के लिए गंभीर है तो दूसरी ओर से स्वास्थ्य विभाग के अनदेखी से लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किए जाने पर लगाम नहीं लग पा रहा है।
अधिकारियों और संचालकों के बीच अनुबंध के बाद बेखौफ़ होकर संचालित होते हैं अल्ट्रासॉउन्ड केंद्र -
वहीं चर्चाओं की माने तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व केंद्र संचालकों के बीच आपसी एक प्रति माह का आर्थिक अनुबंध है, इसी आधार पर ऐसे केंद्र बेरोक-टोक संचालित होते हैं। ऐसे अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच और कार्यवाही के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 अश्वनी कुमार ने बकायदा नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की है बावजूद इसके अल्ट्रासॉउन्ड केंद्र संचालक बेखौफ़ होकर जाँच के नाम पर मरीजों की जान के साथ साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। वहीं ऐसे केंद्रों की जाँच नहीं किए जाने से स्वास्थ्य
दूसरे तल पर धड़ल्ले से संचालित होता है अल्ट्रासॉउन्ड सेंटर -
गिरते लिंगानुपात को लेकर जिम्मेदार महकमा ही अवैध ढंग से संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर इन दिनों मेहरबान है। अवैध अल्ट्रासांउड केंद्र के संचालक विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से सीधे संपर्क में हैं। यहीं कारण है कि प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी इन पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। नगर के सिविल लाइन रोड पर संचालित एक अल्ट्रासॉउन्ड सेंटर दूसरे तल पर संचालित होता है, जबकि मुख्य चिकित्साधिकारी ने पीसीपीएनडीटी की बैठक में बगैर लिफ्ट के दूसरे तल पर अल्ट्रासॉउन्ड सेंटर के संचालन को अवैध करार देते हुए मानकों की अनदेखी पर सख्त कार्यवाही का निर्देश दिया था।
पिछले दो वर्षों से जांच के नाम पर सिर्फ होती है खानापूर्ति -
जिले में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। बताया जाता है कि पिछले दो वर्षों में एक भी अमान्य संस्थाओं पर बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग जांच के बाद सिर्फ नोटिस भेज कर मामले को रफा दफा कर देता है। पिछले दो वर्षों में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दिखावे के लिए लगभग 50 सेंटरों को सिर्फ नोटिस भेजा गया है और आज तक इन नोटिस का न तो जवाब आया और ना ही कोई ठोस कार्यवाही की गयी।
क्या बोले जिम्मेदार -
वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 अश्वनी कुमार ने बताया कि "दूसरे तल पर अल्ट्रासॉउन्ड सेंटर संचालित नहीं हो सकता है, यदि ऐसा कोई सेंटर संचालित हो रहा है तो वो मानक के विपरीत है। नोडल अधिकारी को ऐसे अल्ट्रासॉउन्ड सेंटरों की नियमित जाँच करने और मानक विरुद्ध पाए जाने पर कड़ी कार्यवाही का निर्देश दिया गया है।"




