बताते चलें कि जिले में शिक्षा के हालात अच्छे नहीं हैं। आज ज़ब हम चाँद पर पहुँच चुके हैं लेकिन जनपद सोनभद्र में आज भी आठवीं के बाद बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई छोड़ देती हैं। इसके पीछे मुख्य वजह विद्यालय से घर की अधिक दूरी होती है। सुदूर इलाकों में आवागमन के पर्याप्त साधन नहीं हैं। बभनी, म्योरपुर, दुद्धी, अनपरा, कोन, विंढमगंज, जुगैल, नगवां जैसी दुरूह क्षेत्रों में छात्राओं को पढ़ने के लिए 10-12 किमी दूर से स्कूल जाना पड़ता है। लंबी दूरी के चलते ही कई बार अभिभावक ख़ासकर बेटियों को आगे पढ़ने के लिए नहीं भेजते। इस समस्या के हल के लिए ही कई जगह समाज कल्याण विभाग की ओर से बालिका छात्रावास स्थापित कराया गया है। आवासीय विद्यालय भी संचालित हैं, बावजूद इसके आज भी बड़ी संख्या में आदिवासी छात्रों क़ो विद्यालय पहुंचाना चुनौती बनी हुई है। सत्र 2024-25 तक जिले में 48 राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेज संचालित थे। इस वर्ष छह नए विद्यालयों का संचालन शुरू होने से यह संख्या अब 54 हो गई है। राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज नंदना में भी प्रवेश शुरू हो चुका है। वहीं जिले के 13 पीएम श्री विद्यालयों की छात्राएं भी इस योजना से लाभान्वित होंगी।