Sonbhadra News : अब दूरी नहीं बनेगी बच्चों की पढ़ाई में बाधा, कोटा-करमसार में खुलेंगे राजकीय हाईस्कूल
आदिवासी बाहुल्य सोनभद्र में अशिक्षा के अंधेरे को दूर करने और ग्रामीण बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। माध्यमिक शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय.......

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9:04 PM, August 7, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आदिवासी बाहुल्य सोनभद्र में अशिक्षा के अंधेरे को दूर करने और ग्रामीण बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। माध्यमिक शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी झेल रहे ग्रामीण छात्र-छात्राओं को अब अपने गांव के करीब ही हाईस्कूल की पढ़ाई उपलब्ध कराने की तैयारी है। चोपन विकास खंड के कोटा और करमसार गांव में दो नए राजकीय हाईस्कूल स्थापित किए जाएंगे। दोनों विद्यालयों के निर्माण के लिए करीब 3.18 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है और एक-एक बीघा भूमि भी चिह्नित कर ली गई है।
शिक्षा से दूरी नहीं, अब गांव में ही मिलेगा अवसर -
सोनभद्र का बड़ा भू-भाग वनांचल और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में आता है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा के सामने दूरी बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर माध्यमिक स्तर पर विद्यालयों की दूरी बढ़ जाने से कई बच्चों की पढ़ाई आगे नहीं बढ़ पाती। ऐसे में कोटा और करमसार में राजकीय हाईस्कूल की स्थापना को ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
कोटा के बच्चों को 25 किलोमीटर का नहीं करना होगा सफर -
कोटा गांव से राजकीय इंटर कॉलेज कोन की दूरी करीब 25 किलोमीटर है। वहीं करमसार गांव से राजकीय इंटर कॉलेज ओबरा करीब 12 किलोमीटर दूर है। हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को प्रतिदिन इतनी दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीण इलाकों में सीमित परिवहन साधनों के बीच यह सफर विद्यार्थियों के लिए बड़ी बाधा बन जाता है। इसका असर विशेष रूप से छात्राओं की शिक्षा पर पड़ता है।
नए हाईस्कूल बनने के बाद विद्यार्थियों को लंबी दूरी की निर्भरता से राहत मिलेगी और गांव तथा आसपास के क्षेत्र के बच्चों को घर के नजदीक माध्यमिक शिक्षा का अधिकार मिल सकेगा।
बेटियों की पढ़ाई के लिए भी खुलेगा रास्ता -
दूरी और सुरक्षित आवागमन की समस्या के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार बेटियों को दूर स्थित विद्यालय भेजने से हिचकते हैं। गांव में ही हाईस्कूल खुलने से छात्राओं को सबसे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई जारी रखने का अवसर बढ़ेगा, बल्कि बालिकाओं की शिक्षा को लेकर अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा।
उच्च प्राथमिक विद्यालय होंगे हाईस्कूल में उच्चीकृत -
कोटा और करमसार दोनों स्थानों पर पहले से उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इन्हीं विद्यालयों को उच्चीकृत कर राजकीय हाईस्कूल का स्वरूप दिया जाएगा। इससे विद्यालय के लिए अलग से बच्चों को दूर भेजने की आवश्यकता कम होगी और मौजूदा शैक्षणिक ढांचे का भी बेहतर उपयोग हो सकेगा।
11 राजकीय इंटर कॉलेजों को मिले प्रधानाचार्य -
माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभाग ने हाल ही में जिले के 11 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों की तैनाती की है। प्रधानाचार्यों की तैनाती से विद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ पठन-पाठन की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया जा रहा है। विद्यालयों में टीएलएम और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षण वातावरण देने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षा के जरिए बदलेगा वनांचल का भविष्य -
जिला विद्यालय निरीक्षक जयराम सिंह ने बताया कि "कोटा और करमसार गांव में राजकीय हाईस्कूल की स्थापना की जाएगी। इसके लिए करीब 3.18 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो चुका है। दोनों स्थानों पर भूमि चिह्नित कर ली गई है और जल्द ही निर्माण की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।"




