Sonbhadra News : न बैंक खुलेंगे, न बस चलेगी.........जानें क्या है कारण
बैंकिंग, बीमा, डाक सेवाओं से लेकर कोयला खनन तक के विभिन्न क्षेत्रों के 25 करोड़ से अधिक कर्मचारियों के बुधवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हिस्सा लेने की उम्मीद है। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक....

sonbhadra
10:00 PM, July 8, 2025
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । बैंकिंग, बीमा, डाक सेवाओं से लेकर कोयला खनन तक के विभिन्न क्षेत्रों के 25 करोड़ से अधिक कर्मचारियों के बुधवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हिस्सा लेने की उम्मीद है। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त मंच द्वारा बुलाई गई इस हड़ताल को 'भारत बंद' करार दिया गया है। यह हड़ताल केंद्र सरकार की "मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों" के विरोध में की जा रही है। ट्रेड यूनियनों ने राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को एक बड़ी सफलता बनाने का आह्वान किया है, जिसमें औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों में महीनों की गहन तैयारियों का हवाला दिया गया है।
कौन-कौन सी सेवाएं होंगी प्रभावित -
इस व्यापक कार्रवाई से प्रमुख सार्वजनिक सेवाओं और उद्योगों पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) के जिलाध्यक्ष लल्लन राय ने बताया कि "हड़ताल में देशभर के करोड़ों कर्मचारियों के भाग लेने की उम्मीद है। किसान और ग्रामीण श्रमिक भी देश भर में विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। हड़ताल के कारण बैंकिंग, डाक, कोयला खनन, कारखाने और राज्य परिवहन सेवाएं प्रभावित होंगी। विरोध का मूल कारण यूनियनों द्वारा पिछले साल श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया को सौंपी गई 17 मांगों का एक चार्टर है। यूनियनों का दावा है कि सरकार ने इन मांगों को नजरअंदाज किया है और पिछले एक दशक से वार्षिक श्रम सम्मेलन बुलाने में विफल रही है। उनका कहना है कि यह कदम श्रम बल के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाता है।"
श्रम कोडों को लेकर नाराजगी -
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के श्रम सुधार, जिसमें चार नए श्रम कोडों की शुरुआत भी शामिल है, श्रमिकों के अधिकारों को खत्म करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। यूनियनों का तर्क है कि ये कोड सामूहिक सौदेबाजी को खत्म करने, संघ की गतिविधियों को कमजोर करने, काम के घंटे बढ़ाने और नियोक्ताओं को श्रम कानूनों के तहत जवाबदेही से बचाने का है।




