Sonbhadra News : स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही या साठगांठ? फर्जी कागजों पर चल रहा निजी अस्पतालों का कारोबार
अति पिछड़े जिले में शुमार जनपद सोनभद्र के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां फर्जी CPCB (प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) प्रमाणपत्रों और डॉक्टरों के संदिग्ध....

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 पंकज कुमार राय.....
sonbhadda
5:32 PM, April 8, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । अति पिछड़े जिले में शुमार जनपद सोनभद्र के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां फर्जी CPCB (प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) प्रमाणपत्रों और डॉक्टरों के संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर कई निजी अस्पतालों को न केवल नया पंजीकरण दिया गया, बल्कि उनका रिन्युवल भी करा दिया गया। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
फर्जी कागजों के सहारे खड़ा ‘हेल्थ सिस्टम’ -
सूत्रों के अनुसार, कई निजी अस्पतालों ने बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और पर्यावरणीय मानकों से जुड़े अनिवार्य CPCB प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से प्रस्तुत किए। इतना ही नहीं, अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों की डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेज भी संदिग्ध पाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इन दस्तावेजों की गहन जांच किए बिना ही विभागीय स्तर पर फाइलों को मंजूरी दे दी गई।
विभागीय मिलीभगत से खुला खेल -
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे खेल में विभाग के कुछ वर्तमान और पूर्व अधिकारी व कर्मचारी भी संलिप्त रहे हैं। आरोप है कि अस्पतालों के पंजीकरण और रिन्युवल की प्रक्रिया को आसान बनाने के नाम पर अस्पताल संचालकों से मोटी रकम वसूली गई। पैसों के दम पर नियमों को दरकिनार कर कई अस्पतालों को संचालन की अनुमति दे दी गई।
मरीजों की जान से सीधा खिलवाड़ -
फर्जी डॉक्टरों और मानकों के बिना संचालित अस्पताल सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। बिना योग्य चिकित्सकों और आवश्यक सुविधाओं के इलाज किया जाना गंभीर लापरवाही का मामला है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
उठी निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग -
मामला उजागर होने के बाद स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही फर्जी तरीके से संचालित अस्पतालों को तत्काल सील करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही जा रही है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल -
इतने गंभीर मामले के सामने आने के बावजूद अब तक जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। लोगों में चर्चा है कि क्या इस पूरे खेल पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है या फिर किसी बड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
अप्रैल में फिर शुरू होगा पंजीकरण का दौर -
गौरतलब है कि अप्रैल माह की शुरुआत के साथ ही पिछले वर्ष पंजीकृत अस्पतालों के नवीनीकरण की प्रक्रिया फिर शुरू होनी है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो स्वास्थ्य विभाग में एक बार फिर ‘पैसों का खेल’ शुरू हो सकता है।
"यह प्रकरण केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की जड़ों तक पहुंच चुकी भ्रष्टाचार की गहरी सड़ांध और लापरवाही को दिखाता है। ऐसे में जब फर्जी प्रमाणपत्रों और संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर अस्पतालों का पंजीकरण या नवीनीकरण दिया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठ जाएं, तो यह सीधे तौर पर आम जनता की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर मरीजों की सुरक्षा और कानून का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? यदि समय रहते इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आमजनता का स्वास्थ्य व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह उठ सकता है। अब जरूरत है कि प्रशासन इस गंभीर मामले को महज एक खबर समझकर न टाले, बल्कि ठोस कार्रवाई कर यह संदेश दे कि जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।"



