Sonbhadra News : लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम ने नवजात को माँ से कर दिया जुदा, स्वास्थ्य विभाग का फिर आया रटारटाया जबाब
परिजनों का आरोप है कि कंचन की हालत बिगाड़ने में रामा हॉस्पिटल का हाथ है । रामा हॉस्पिटल यदि समय रहते कंचन को रेफर कर दिया होता तो आज जच्चा-बच्चा दोनों जिंदा रहते ।

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10:37 PM, October 22, 2026
- बिना रजिस्ट्रेशन का चल रहा था रामा हॉस्पिटल
शांतनु कुमार
सोनभद्र । राबर्ट्सगंज में अवैध रूप से चल रहा रामा अस्पताल एक बार फिर उस वक्त चर्चा में आ गया जब एक मृतक महिला का शव लेकर परिजन अस्पताल के बाहर हंगामा करने लगे। मामला बढ़ता देख पुलिस भी मौके पर पहुँच गयी। इस मामले में एसीएमओ व नोडल गुलाब शंकर ने FIR दर्ज कराने की बात कही है।
परिजनों के मुताबिक कंचन मौर्या (29) पत्नी मिथिलेश कुमार मौर्या निवासी राजधन, चोपन को प्रसव दर्द हुआ तो लोढ़ी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, जहाँ 12 घण्टे रखने के बाद वाराणसी रेफर करने की बात करने लगे। इसके बाद वहाँ एक शख्स ने परिजनों को रामा अस्पताल की बात कहकर वहां भर्ती कर दिया, जहां दूसरे दिन कंचन का ऑपरेशन बच्चे को जन्म दिया गया। परिजन के मुताबिक ऑपरेशन के बाद से जच्चा-बच्चा की हालत अच्छी नहीं रही । जिसे देखते हुए नवजात को राबर्ट्सगंज के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन कंचन की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी बावजूद इसके डॉक्टर लगातार ठीक होने का आश्वासन देते रहे । लेकिन जब परिजनों को यह आभास हुआ कि कंचन की हालत ज्यादा गंभीर है तो उन्होंने उसे लेकर वाराणसी में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई । परिजनों का आरोप है कि कंचन की हालत बिगाड़ने में रामा हॉस्पिटल का हाथ है । रामा हॉस्पिटल यदि समय रहते कंचन को रेफर कर दिया होता तो आज जच्चा-बच्चा दोनों जिंदा रहते । इसी नाराजगी के चलते गुरुवार को परिजन शव लेकर वाराणसी से रामा हॉस्पिटल न्यू कॉलोनी पहुंचे और हंगामा करने लगे। हंगामा की खबर जैसे ही पुलिस को हुई दलबल के साथ पुलिस बल मौके पर पहुंच गए और मामले को सलटाने में जुट गए । मामला बढ़ता देख डिप्टी सीएमओ व नोडल गुलाब शंकर भी मौके पर पहुंच गए । नोडल ने बताया कि रामा हॉस्पिटल पूरी तरह से अवैध है, इसका पूर्व में बना लाइसेंस रद्द कर दिया गया है और मामला कोर्ट में विचाराधीन है । रामा हॉस्पिटल में प्रसव कराया जाना गैरकानूनी है जिसके तहत उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी ।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब कंचन को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया तो आखिर वहाँ से रेफर की बात क्यों कही गयी। क्या अब मेडिकल कॉलेज प्रसव मरीजों को भी रेफर कर रहा है।
वहीं दूसरी तरफ रामा हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द होने के बावजूद वह अपने घर से अस्पताल संचालित कैसे करता रहा । इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को पहले क्यों नहीं हुई। आखिर स्वास्थ्य विभाग हर बार मौत के बाद ही क्यों जागता है ।
लोगों का कहना है कि यह सब मिली जुली व्यवस्था है। स्वास्थ्य विभाग को सब पता रहता है लेकिन कार्यवाही तब करता है जब कोई घटना घट जाती है । ऐसे में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में है । अभी भी लोगों के सामने वही सवाल खड़ा है कि आखिर सोनभद्र में कितने अवैध अस्पताल संचालित किये जा रहे हैं इसकी विज्ञप्ति जारी किया जाय ।
कुल मिलाकर एक बार फिर एक बच्चा सिस्टम की लापरवाही के चलते अनाथ हो गया और एक पूरा परिवार बिखर कर गया । आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है? मजे की बात यह है कि हर बार स्वास्थ्य विभाग अस्पताल पर कार्यवाही तो कर देता है मगर जिम्मेदार अफसर पर कभी कार्रवाई नहीं होती । लोगों की मांग है कि नोडल सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, तभी व्यवस्था बदलेगी।




