Sonbhadra News : मां अमिला का भव्य सजावट बना आकर्षक का केंद्र
मन्नत पूर्ण होने पर कुछ श्रद्धालुओं द्वारा मां अमिला के गर्भ गृह समेत पूरे दरबार को सप्तमी की सांय भव्य रूप से फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर आकर्षण का केंद्र बन हुआ है।

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6:46 PM, March 26, 2026
पी के विश्वकर्मा (संवाददाता)
० मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु ने कराया भव्य सजावट
कोन (सोनभद्र) । स्थानीय विकास खण्ड कोन के ग्राम पंचायत चकरिया ब्रहमोरी के दुर्गम क्षेत्र के ऊंची पहाड़ी पर स्थित मां अमिला धाम दर्शन पूजन के लिए चैत्र नवरात्र के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। मन्नत पूर्ण होने पर कुछ श्रद्धालुओं द्वारा मां अमिला के गर्भ गृह समेत पूरे दरबार को सप्तमी की सांय भव्य रूप से फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर आकर्षण का केंद्र बन हुआ है।
कोन निवासी श्रद्धालु श्यामराज गुप्ता एवं मुन्नालाल गुप्ता ने पूर्व में मां अमिला से अपनी मनोकामना पूर्ण होने की मन्नत मांगा था, जो पूर्ण होने पर उन्होंने चैत्र नवरात्र में माता के दरबार को विशेष रूप से सजाने का संकल्प लिया। मन्नत पूर्ण होने पर दोनों श्रद्धालुओं ने अपने सहयोगियों रमेश चतुर्वेदी, विकास रघुवंशी सहित अन्य साथियों के साथ मिलकर मंदिर परिसर को फूल-मालाओं एवं आकर्षक चुनरी से सजाया।
सजावट इतनी भव्य और मनमोहक रही कि मंदिर का दृश्य देखते ही श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। चारों ओर पुष्पों की सुगंध और धार्मिक वातावरण ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। मंदिर में माता के दर्शन के लिए दूर-दराज झारखंड , छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं की अष्टमी से काफी भीड़ देखी जा रही है। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध तरीके से लगकर माता के दर्शन-पूजन किए तथा अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की। लोगों ने बताया कि मां के दर्शन मात्र से ही मनोकामना पूरी होती है। जहां नवमी से बकरे की बली देने की भी होड़ लगी रहती है। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था
बनाए रखने के लिए चकरिया चौकी इंचार्ज शिवप्रकाश यादव अपने पुलिस बल व पीएसी के साथ मौजूद रहे।वही स्थानीय लोगों और मंदिर कमेटी के द्वारा भी सहयोग किया गया, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो रही है। चैत्र नवरात्र के इस पावन अवसर पर मां अमिला के दरबार की भव्य सजावट एवं श्रद्धालुओं की आस्था ने क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का वातावरण बना दिया।जो एकादशी तक काभी भीड़ रहती है।



