Sonbhadra News : फ्रीडम को लेकर मेडिकल कॉलेज के छात्र बैठे धरने पर, प्रिंसिपल बोले कॉलेज के नियम मानने होंगे
जिन बच्चों को मार्केटिंग के लिए बाहर जाना है वह कॉलेज की बस से ही जाएंगे और हर हालत में शाम 7:00 बजे तक उन्हें कैंपस में आना होगा । छुट्टी वाले दिन तीन से चार घंटे तक बाहर जाने की अनुमति होगी।

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10:40 PM, October 23, 2026
शांतनु कुमार/प्रकाश खत्री
सोनभद्र। फ्रीडम-फ्रीडम के नारे के साथ मेडिकल कॉलेज के छात्र आज शाम अचानक धरने पर बैठ गए। धरने की खबर जैसे ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन को हुई हड़कम्प मच गया। मेडिकल प्रशासन को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर माजरा क्या है। उधर मेडिकल छात्रों का कहना है कि उन्हें आजादी चाहिए।
धरने की खबर सुनकर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल मौके पर पहुंचे और छात्रों से बात की। लेकिन छात्र अपनी आजादी की मांग को लेकर अड़े रहे।
मीडिया से बात करते हुए प्रिंसिपल आई जेन भट्टाचार्य ने बताया कि छात्रों के लिए कुछ नियम बनाये हुए हैं। जिसमें सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक क्लास के दौरान बाहर जाने पर रोक लगा दी है। उनका कहना है कि जिन बच्चों को मार्केटिंग के लिए बाहर जाना है वह कॉलेज की बस से ही जाएंगे और हर हालत में शाम 7:00 बजे तक उन्हें कैंपस में आना होगा । उन्होंने कहा कि छुट्टी वाले दिन तीन से चार घंटे तक बाहर जाने की अनुमति रहेगी लेकिन शाम को आने का समय निर्धारित रहेगा । वहीं प्रिंसिपल ने बताया कि बच्चे मेस में रेगुलर नहीं खा रहे हैं और जिस दिन भी नहीं खाते हैं उस दिन का वह पैसा नहीं देते हैं । जबकि कैंटीन पूरे महीने भर संचालित होता है । उन्होंने कहा कि कैंटीन के कुछ नियम है और कैंटीन कर्मचारियों को उनके मालिक द्वारा तनख्वाह दिया जाता है । यदि बच्चे कभी खाएं कभी ना खाएं की स्थिति बनी रहेगी तो कैंटीन में अव्यवस्था फैल जाएगी । उनका कहना है कि यदि ऐसे बच्चे जो कैंटीन में नहीं खाना चाहते हैं वह बाहर खा सकते हैं ।
वहीं बाहरी गाड़ियों के प्रवेश पर भी कॉलेज में रोक लगाई गई है । उन्होंने घटना पर जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में डॉक्टर की सड़क हादसे में मौत हो गई थी । वह नहीं चाहते हैं कि कोई अनहोनी बच्चों के साथ घटित हो । उनका कहना है कि बच्चे यहां मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए आए हैं, उनके मां-बाप बड़ी जिम्मेदारी के साथ कॉलेज भेजते हैं ताकि वह पढ़ लिख कर डॉक्टर बने लेकिन जिस तरह से बच्चे आजादी चाहते हैं और अपनी मनमानी कर रहे हैं वह कत्तई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि बच्चों की जो शिकायतें हैं वह अपनी एक मांग पत्र बनाकर प्रशासन को सौपें, प्रशासन कमेटी उस पर विचार करेगी।
वहीं जब मेडिकल छात्रों से बात करने का प्रयास किया गया तो छात्र कैमरे पर कुछ भी बोलने से कतराते नजर आए । उनका सिर्फ एक ही रट था कि उन्हें आजादी चाहिए ।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि मेडिकल प्रशासन कॉलेज में कुछ नियम बनाए हुए हैं तो छात्रों को उन्हें मनाना चाहिए क्योंकि वह नियम उनके हित व उनके भविष्य के बेहतरी के लिए हैं । ऐसे में यदि छात्र फ्रीडम चाहते हैं तो उनकी आजादी कितनी होगी यह मेडिकल प्रशासन ही तय करेगा ।
अब देखने वाली बात यह है कि मेडिकल प्रशासन छात्रों की मांग को कैसे हैंडल करता है।




