Sonbhadra News : पतंजलि योग शिविर ओबरा में गूंजा अष्टांग योग का मंत्र, विभिन्न हस्त मुद्राओं से असाध्य रोगों के उपचार की दी गई जानकारी
स्थानीय चिल्ड्रेन पार्क स्थित योग भवन में चल रहा 25 दिवसीय सहायक योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ते हुए सफलता के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है।

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8:57 PM, June 10, 2026
घनश्याम पांडेय (संवाददाता)
ओबरा (सोनभद्र) । स्थानीय चिल्ड्रेन पार्क स्थित योग भवन में चल रहा 25 दिवसीय सहायक योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ते हुए सफलता के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। बुधवार को शिविर के 21वें दिन का शुभारंभ मुख्य अतिथि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ओबरा के उप कमांडेंट आनंद के कर-कमलों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। यह भव्य प्रशिक्षण शिविर भारत स्वाभिमान (उत्तर प्रदेश पूर्व) के राज्य प्रभारी भाई भगवान एवं पतंजलि योग समिति (उत्तर प्रदेश पूर्व) के राज्य प्रभारी भाई दुर्गेश के कुशल नेतृत्व तथा सोनभद्र पतंजलि के सभी संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। प्रातःकालीन सत्र में मुख्य योग शिक्षक भाई नरेंद्र सिंह और योगी वीरेंद्र ने उपस्थित साधकों को स्वामी रामदेव महाराज द्वारा निर्धारित योग पैकेज का गहन अभ्यास कराया। योग शिक्षकों ने महर्षि पतंजलि प्रतिपादित अष्टांग योग के सिद्धांतों को समझाते हुए यौगिक जॉगिंग और सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराया। इसके साथ ही खड़े होकर, बैठकर (मधुमेह नाशक), पीठ के बल और पेट के बल लेटकर किए जाने वाले विभिन्न आसनों की सही विधि और उनके वैज्ञानिक लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। शिविर के 21वें दिन योग शिक्षकों ने शरीर के पंचतत्वों को संतुलित करने वाली विभिन्न हस्त मुद्राओं के चमत्कारी लाभों से साधकों को रूबरू कराया। ज्ञान व वायु मुद्रा गठिया (आर्थराइटिस), सायटिका, घुटने का दर्द और रीढ़ व कमर के दर्द में अत्यंत लाभकारी।
शून्य मुद्रा कान के दर्द और थायराइड की समस्या में राहत दिलाती है। पृथ्वी मुद्रा शारीरिक दुर्बलता को दूर करती है और वजन/मोटापा संतुलित करती है। प्राण मुद्रा आंखों की रोशनी बढ़ाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए उपयोगी। अपान मुद्रा बवासीर, मधुमेह (शुगर) और हृदय रोगों में विशेष लाभकारी। अपान वायु मुद्रा सिरदर्द और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) को नियंत्रित करती है। सूर्य मुद्रा मोटापा कम करने और शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाने में मददगार। अरुण मुद्रा चर्म रोग (स्किन एलर्जी) और चेहरे के मुंहासों को ठीक करती है। लिंग मुद्रा सर्दी-जुकाम, खांसी और लकवा (पैरालिसिस) जैसी दिक्कतों में राहत देती है।
शिक्षकों ने बताया कि इनके अतिरिक्त 12 अन्य महत्वपूर्ण मुद्राएं भी हैं, जो मानव शरीर को निरोगी रखने में मदद करती हैं। सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि CISF के उप कमांडेंट आनंद जी ने पतंजलि परिवार की सराहना की। उन्होंने कहा योगी वीरेंद्र जी का योग के प्रति समर्पण पूरी तरह अनुकरणीय है। यहाँ सभी साधकों को एकरूपता के साथ योग करते देखना बेहद सुखद अनुभव है। जैसा निर्देश शिक्षक देते हैं, वैसा ही क्रमशः करने से शरीर को पूरा लाभ प्राप्त होता है। यह योग प्रशिक्षण शिविर बहुत ही सुंदर, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संचालित हो रहा है। मैं पतंजलि परिवार के सभी सदस्यों और प्रभारियों को इस पुनीत कार्य के लिए बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ। 21वें दिन के इस विशेष सत्र को सफल बनाने में पतंजलि के वरिष्ठ योग शिक्षकों और साधकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे। योग शिक्षक व भाई लालजी, देवेश कुमार सिंह, बबलू प्रजापति, राजकुमार मास्टर, प्रमोद तिवारी, रामाकांत, राजेश शर्मा, राजाराम सिंह, घनश्याम सिंह, अरुण, कृष्ण कुमार। महिला विंग/बहनें मंजू देवी, उर्मिला, रेनू, पार्वती, सुखिया, रंजना पांडेय, सुभाषा सहित भारी संख्या में स्थानीय योग साधक उपस्थित रहे।




