Sonbhadra News : नहाय-खाय के साथ आस्था का महापर्व छठ शुरू, खरना आज
नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय सूर्योपासना का महापर्व छठ मंगलवार से शुरू हो गया है। नहाय-खाय के दिन लौकी की प्रमुखता होती है। इस कारण छठ व्रती महिलाएं लौकी की सब्जी के साथ भात और चने के दाल के साथ विविध..

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9:58 AM, November 6, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• महापर्व छठ में स्वच्छता और पवित्रता का विशेष है महत्त्व
• व्रतियों को कई कठिन नियमों का करना पड़ता है पालन
सोनभद्र । नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय सूर्योपासना का महापर्व छठ मंगलवार से शुरू हो गया है। नहाय-खाय के दिन लौकी की प्रमुखता होती है। इस कारण छठ व्रती महिलाएं लौकी की सब्जी के साथ भात और चने के दाल के साथ विविध भोजना बनाती हैं और उसे भगवान सूर्य को अर्पित कर प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं। नहाय-खाय के दिन भोजन बनाने में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है।
छठ व्रत पर स्वच्छता और पवित्रता पर दिया जाता है विशेष ध्यान -
नहाय-खाय के दिन से घरों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस पर्व में स्वच्छता और पवित्रता का विशेष महत्त्व है। इसमें कई कठिन नियमों का पालन करना पड़ता है। इस महाप्रसाद को पहले सूर्य देवता को अर्पित किया जाता है। उसके बाद छठ व्रती इस प्रसाद को ग्रहण करती हैं। फिर सभी को महाप्रसाद का वितरण किया जाता है। इस पर्व की महत्ता इसलिए भी है कि इस पर्व में परिवार के सभी सदस्यों की खुशहाली और प्रगति की कामना की जाती है।
छठ पूजा के लिए खरना का होता है विशेष महत्व -
खरना की परंपरा छठ पूजा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी गई है। इस पर्व को सूर्य षष्टी के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि जो साधक इस दौरान व्रत रखते है उनके जीवन से संतान और धन संबंधी समस्याएं दूर होती है। जिला मुख्यालय और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अनगिनत घरों में छठ व्रत किया जाता है। बुधवार को छठ पर्व का खरना है तथा गुरुवार को छठ पर्व का पहला अर्घ्य दिया जाएगा। आज महापर्व का दूसरा दिन है। इस चार दिवसीय पर्व के दौरान छठी मैया और सूर्य देव की पूजा का विधान है।




