Sonbhadra News : आरक्षण नीति की समीक्षा और सवर्ण आयोग की मांग को लेकर गरजा क्षत्रिय कल्याण परिषद
आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा, आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने और सवर्ण आयोग के गठन की मांग को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय कल्याण परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। परिषद ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर.......

कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते क्षत्रिय कल्याण परिषद पदाधिकारी
sonbhadra
6:18 PM, August 27, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा, आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने और सवर्ण आयोग के गठन की मांग को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय कल्याण परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। परिषद ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर आरक्षण व्यवस्था समेत एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों पर पुनर्विचार किए जाने की मांग की। परिषद ने बताया कि सामाजिक न्याय के नाम पर किसी भी वर्ग की उपेक्षा स्वीकार नहीं की जाएगी और मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।
परिषद ने अपने ज्ञापन में कहा कि संविधान में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं शैक्षणिक रूप से कमजोर वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। परिषद का कहना है कि समय के साथ आरक्षण का लाभ एक सीमित वर्ग तक सिमटता जा रहा है, जिससे समाज के अन्य जरूरतमंद वर्गों में असंतोष उत्पन्न हो रहा है। ऐसे में आरक्षण व्यवस्था की निष्पक्ष एवं व्यापक समीक्षा आवश्यक है।
परिषद ने अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग, अल्पसंख्यक आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग की तर्ज पर सवर्ण आयोग गठित किए जाने की मांग उठाई। परिषद के अनुसार सवर्ण समाज में भी आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर परिवार मौजूद हैं, जिनकी समस्याओं और हितों के लिए एक अलग संवैधानिक एवं संस्थागत मंच आवश्यक है।
आर्थिक आधार पर मिले आरक्षण का लाभ
ज्ञापन में प्रमोशन में आरक्षण समाप्त करने तथा आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाए जाने की मांग की गई। परिषद का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति किसी भी जाति या वर्ग का हो, उसे शिक्षा, रोजगार और विकास के अवसरों में समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
एससी/एसटी एक्ट को लेकर भी परिषद ने कड़ा रुख अपनाया। परिषद ने एक्ट को पूर्णतया समाप्त करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इसके दुरुपयोग की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है। परिषद ने कहा कि कानून का उद्देश्य न्याय और सामाजिक सौहार्द स्थापित करना होना चाहिए, न कि समाज में आपसी अविश्वास और दूरी बढ़ाना।
निर्णायक मोड़ पर अब समानता की लड़ाई -
परिषद के जिलाध्यक्ष प्रद्युम्न कुमार सिंह ने कहा कि “आरक्षण जिस उद्देश्य से लागू किया गया था, उस उद्देश्य की ईमानदारी से समीक्षा करने का समय आ गया है। यदि सरकार वास्तव में सामाजिक न्याय चाहती है तो आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को उसकी जाति देखकर नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक स्थिति देखकर अवसर दिया जाना चाहिए। सवर्ण समाज के गरीब और वंचित परिवारों की आवाज को अनदेखा करना अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सवर्ण आयोग का गठन समय की आवश्यकता है। परिषद किसी वर्ग के अधिकार छीनने की नहीं, बल्कि समानता के आधार पर सभी वर्गों को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि मांगों को लेकर संगठन आने वाले दिनों में भी आवाज बुलंद करता रहेगा।"
वहीं रामनिवास तोमर ने तल्ख अंदाज में कहा कि “समानता केवल भाषणों से नहीं, बल्कि नीतियों में दिखाई देनी चाहिए। यदि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है तो आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति के साथ जाति के आधार पर भेदभाव क्यों हो? सरकार को अब वोट की राजनीति से ऊपर उठकर न्याय की राजनीति करनी होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून का दुरुपयोग समाज के लिए गंभीर विषय है और ऐसे प्रावधानों की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है। “क्षत्रिय समाज अपने अधिकारों की आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेगा। जब तक हमारी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं होता, तब तक परिषद लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी।”
परिषद ने राष्ट्रपति से मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक एवं सकारात्मक निर्णय लिए जाने की अपील की साथ ही चेताया कि यदि मांगों पर प्रभावी पहल नहीं हुई तो संगठन समान विचारधारा वाले संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन को और व्यापक रूप देने पर विचार करेगा।




