Sonbhadra News : कनहर बांध उफान पर, खोले गए 11 फाटक, मगर सामने आई यह बड़ी लापरवाही
कनहर सिंचाई परियोजना के बांध में लगातार बढ़ रहे जलस्तर ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। कैचमेंट एरिया में लगातार हो रही बारिश के कारण कनहर बांध का जलस्तर बढ़कर 262.500 मीटर तक पहुंच गया है।

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2:31 PM, September 1, 2026
- बांध का जलस्तर 262.500 मीटर पहुंचा
- प्रशासन की अपील के बावजूद दर्जनभर नावों से मछली पकड़ रहे मछुआरे
- हादसे का मंडरा रहा खतरा
- सुरक्षा व्यवस्था पर खड़ा हुआ सवाल
राजा (संवाददाता)
अमवार (सोनभद्र)। कनहर सिंचाई परियोजना के बांध में लगातार बढ़ रहे जलस्तर ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। कैचमेंट एरिया में लगातार हो रही बारिश के कारण कनहर बांध का जलस्तर बढ़कर 262.500 मीटर तक पहुंच गया है। बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए बांध के 11 फाटकों को करीब दो-दो मीटर तक खोलकर पानी की निकासी की जा रही है।
बांध में पानी की लगातार बढ़ती आवक को देखते हुए प्रशासन की ओर से लोगों को बांध के गहरे पानी और जलधारा के आसपास नहीं जाने तथा सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। इसके बावजूद कनहर बांध में दर्जनभर से अधिक नावों के सहारे मछुआरों द्वारा लगातार मछली पकड़ने का काम किया जा रहा है। पानी का बहाव तेज होने के कारण यह लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
प्रशासन की अपील का नहीं दिख रहा असर
बांध के फाटक खोले जाने के बाद पानी का बहाव और अधिक तेज हो गया है। ऐसे में नाव से बांध के जलाशय में उतरना जोखिम भरा माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बांध में अचानक जलस्तर बढ़ने या पानी के बहाव में परिवर्तन होने की स्थिति में नावों को संभालना मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, बांध में मछली पकड़ने के लिए कई नावें लगातार पानी में दिखाई दे रही हैं। यदि किसी नाव का संतुलन बिगड़ता है या तेज बहाव की चपेट में आती है तो मछुआरों की जान पर बन सकती है। इसके बावजूद मौके पर प्रभावी निगरानी और रोकथाम नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
कनहर बांध में पहले भी पानी के बढ़ते स्तर के दौरान लोगों के पानी के करीब जाने और मछली पकड़ने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बांध क्षेत्र में नियमित गश्त कराई जाए और प्रतिबंधित क्षेत्र में नावों के संचालन तथा मछली पकड़ने पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि बांध के गेट खुले होने और जलस्तर लगातार बढ़ने की स्थिति में किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को पहले से ही सतर्कता बरतनी चाहिए।
हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन की अपील के बावजूद यदि मछुआरे इसी तरह नाव लेकर बांध में उतरते रहे और कोई हादसा हो गया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए बांध क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, नावों से मछली पकड़ने पर रोक और लगातार निगरानी की मांग की है।
फिलहाल 262.500 मीटर जलस्तर और 11 गेट दो-दो मीटर खुले होने के बीच बांध में लगातार बढ़ रहे पानी को देखते हुए प्रशासन के सामने जल निकासी के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।




