Sonbhadra News : ₹20 हजार से शुरू हुआ सफर, आज 20 लोगों को दे रहीं रोजगार, हेमा बनीं मिसाल
कभी परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी करने को मजबूर रहने वाली करमा ब्लॉक के सरौली गांव की हेमा कुमारी आज महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। महज 20 हजार रुपये से शुरू हुआ उनका छोटा सा कारोबार अब....

महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी युवा महिला उद्यमी हेमा......
sonbhadra
7:22 PM, May 24, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । कभी परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी करने को मजबूर रहने वाली करमा ब्लॉक के सरौली गांव की हेमा कुमारी आज महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। महज 20 हजार रुपये से शुरू हुआ उनका छोटा सा कारोबार अब लाखों के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। इतना ही नहीं, आत्मनिर्भर बनी हेमा आज 20 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। उनकी यह सफलता राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और योगी सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
27 वर्षीय हेमा कुमारी ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उनके परिवार की स्थिति बेहद खराब थी। जीवन यापन के लिए उन्हें मजदूरी तक करनी पड़ी। इसी बीच उन्होंने सत्य आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने संघर्ष को नई दिशा दी। एनआरएलएम के माध्यम से उन्हें फर्नीचर निर्माण का प्रशिक्षण मिला और शुरुआती कारोबार के लिए 20 हजार रुपये का ऋण भी उपलब्ध कराया गया। हेमा ने अपने पति धर्मेंद्र प्रजापति के साथ मिलकर लकड़ी के फर्नीचर बनाना शुरू किया। शुरुआत में स्थानीय बाजारों में छोटे स्तर पर फर्नीचर बेचा गया, लेकिन उनके काम की गुणवत्ता और डिजाइन लोगों को पसंद आने लगी। धीरे-धीरे बाजार में मांग बढ़ी और कारोबार रफ्तार पकड़ता चला गया।
हेमा आगे बताती हैं कि एनआरएलएम ने सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं की, बल्कि समय-समय पर व्यवसाय प्रबंधन, विपणन और कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर उन्हें आगे बढ़ने का हौसला भी दिया। कारोबार बढ़ने पर उन्होंने अपनी खुद की दुकान खोली। बाद में एनआरएलएम के जरिए उन्हें 5 लाख रुपये का ऋण मिला। समय से ऋण चुकाने के बाद दोबारा 5 लाख रुपये की सहायता लेकर उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार करते हुए इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री भी शुरू कर दी।
आज स्थिति यह है कि उनके बनाए फर्नीचर की बाजार में जबरदस्त मांग है। काम का दायरा बढ़ने के बाद उन्होंने 20 कारीगरों को रोजगार दे रखा है। कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करने वाली हेमा आज सालाना करीब 20 लाख रुपये की आमदनी कर रही हैं। वह अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के साथ पूरे परिवार का सम्मानजनक तरीके से पालन-पोषण कर रही हैं। हेमा का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन वह अपने गांव में दूसरों के लिए रोजगार का जरिया बनेंगी। लेकिन योगी सरकार की योजनाओं और प्रशासनिक सहयोग ने उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की उपायुक्त सरिता सिंह ने बताया कि "ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एनआरएलएम के माध्यम से कौशल विकास, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि हेमा जैसी महिलाएं प्रदेश की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं और सरकार हर जरूरतमंद महिला को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।"




