राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि आज 200 आंगनबाड़ियों को किट उपलब्ध कराई गई हैं। प्रत्येक किट में कुर्सी, साइकिल सहित 22 से 23 प्रकार के उपकरण बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु दिए जाते हैं, ताकि गरीब परिवारों के बच्चे भी सुगमता से पढ़ सकें और आगे बढ़ सकें। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जो वनाधिकार के तहत आज लाभार्थियों को पट्टा दिया जा रहा है, इसके साथ ही वनाधिकार खतौनी का वितरण किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा किये जाने वाला यह कार्य सराहनीय है। उन्होंने कहा कि राज्य एवं केन्द्र सरकार द्वारा जो भी योजनाएं संचालित होती है, उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक के लोगों को मिले, उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा जिस कार्य के लिए जो भी बजट की मांग की जाती है, उसका उपभोग समय से करना चाहिए और समय से बजट की मांग भी की जानी चाहिए, बजट को समय से खर्च होने पर समाज के अंतिम व्यक्तियों, गरीब, असहाय, दिव्यांग, आदिवासी वर्ग के लोगों को इस योजना का लाभ समय से मिल जाता है। राजस्व विभाग द्वारा खतौनी से सम्बन्धित जो भी मामले होते हैं, उसका निस्तारण निर्धारित समय अवधि में किया जाना चाहिए, ग्राम स्तर पर चौपाल लगाकर खतौनी से सम्बन्धित मामलों के निस्तारण किये जाने चाहिए, समय से खतौनी से सम्बन्धित मामले के निस्तारण होने से व्यक्ति अपने जमीन का मालिकाना हक प्राप्त होता है और भूमि से सम्बन्धित विवाद की संभावना समाप्त होती है। उन्होंने कहा कि भूमि से सम्बन्धित मामलों जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक द्वारा तत्परता के साथ कार्यवाही की जानी चाहिए, जिससे कि पीड़ित व्यक्तियों को समय से न्याय मिले, जिससे कि माफिया दबंग द्वारा किसी की भूमि पर गलत तरीके से कब्जा न कर सकें और किसी गरीब का शोषण न कर सकें। इच्छा व्यक्त की कि पूरे प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों तक इस प्रकार की सामग्री पहुँचे, जिससे बच्चों को बैठने और पढ़ने के लिए उपयुक्त वातावरण मिल सके। राज्यपाल ने विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छता पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्रत्येक 15 दिन में आधा घंटा निकालकर बच्चों के नाखून काटने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। राज्यपाल ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र की बच्चियों द्वारा प्रस्तुत गये सुन्दर व मनमोहक नृत्य की सराहना भी की।