Sonbhadra News : खबर का असर : वन विभाग डीएफओ टीम ने वन विभाग की जमीन पर हो रही खेती व अवैध खनन का किया स्थलीय निरिक्षण
रात के अधेरों में बालू का अवैध खनन परिवहन स्थानीय वन विभाग के कर्मचारियों के मिली भगत से धड़कल्ले से किया गया है


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रात के अधेरों में बालू का अवैध खनन परिवहन स्थानीय वन विभाग के कर्मचारियों के मिली भगत से धड़कल्ले से किया गया है

राकेश चौबे
मारकुंडी (सोनभद्र) कैमूर वन क्षेत्र के अन्तर्गत कनछ सेंन्चुरी बीट के अन्तर्गत सैकड़ो एकड़ भूमि अतिक्रमण कर अरहर, तिल, धान की खेती करने के साथ पीएसी कैम्प से महज 800 से 500 मीटर की दूरी पर रात के अधेरों में बालू का अवैध खनन परिवहन स्थानीय वन विभाग के कर्मचारियों के मिली भगत से धड़कल्ले से किया जा रहा था। जिसकी खबर जनपद न्यूज live ने 22 अगस्त को वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर हो रही खेती शिर्ष नाम से प्रमुखता से चलाई थी। जिसका असर 30 अगस्त दोपहर के पश्चात लगभग 3 बजे तापस मिहिर डीएफओ मीरजापुर अपने दलबल के साथ स्थलीय निरिक्षण करते हुए दर्जन भर ग्रामीण महिलाओं से जानकारी लेते हुए कनछ बीट पीएसी कैम्प से महज 500 से 800 मीटर की दूरी पर हो रहे बालू की अवैध खनन स्थल का भी निरिक्षण करते हुए सोन नदी के किनारे वन माफियाओं द्वारा सैकड़ों विगहा वन भूमि का अतिक्रमण कर अरहर, तिल और धान की लहलहाती हुई खेती भी देखी, इसके पश्चात कनछ पकरी जग़ल होते हुए कोड़यील के जगंलों का निरिक्षण करते हुए साय 6 बजे के लगभग वापस लौट गये।
उक्त सम्बंध में कैमूर वन सेंचुरी वन विभाग डीएफओ तापस मिहिर मिर्जापुर से जानकारी तो उन्होंने बाताया कि शिकायत कर्ताओं की बाते सत्य पाई गई हैं। कुछ जगहों पर वन विभाग और कास्त की भूमि सटी होने के कारण वन भूमि की सटीक जानकारी नहीं हो पाई जिसकी सही पैमाइस कराने का आदेश दे दिया गया है। जांच के पश्चात दोषियों पर कार्यवाही की जायेगी और अवैध बालू खनन की भूमि को कास्त की भूमि बताई गई है।
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