जिले में पंजीकृत हॉस्पिटल और पैथोलॉजी लैब के आकड़ों की बात करें तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास खुद इसका सही आकड़ा मौजूद नहीं मिलेगा लेकिन गांव से लेकर शहर तक कुकुरमुत्ते की तरह गली-गली में अस्पताल, पैथालाजी सेंटर व डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हो रहे हैं और तो और कई ऐसे भी हैं, जो आगे मेडिकल की दुकान चला रहे हैं और पीछे दो कमरों में पूरा नर्सिंग होम संचालित कर रहे हैं। इन अस्पतालों में कोई डिग्री धारक चिकित्सक भी नहीं है। लेकिन हर तरह के मरीजों को भर्ती कर उनका आर्थिक शोषण के अलावा जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इन अस्पतालों पर अक्सर सप्ताह में एक मौत चिकित्सकों की लापरवाही से होने की बात को लेकर विवाद होता है, लेकिन धीरे-धीरे मामला ठंडा हो जाता है। रॉबर्ट्सगंज, मारकुण्डी, चोपन, घोरावल, दुद्धी, ओबरा, रामगढ़, म्योरपुर सहित जिले का कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है।