Sonbhadra News : डीएल टेस्ट में फेल हुए तो अब जेब होगी ढीली, दोबारा परीक्षा से पहले लेना होगा प्रशिक्षण
स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले वाहन चालकों के लिए अब ड्राइविंग टेस्ट में लापरवाही भारी पड़ सकती है। परीक्षा में फेल होने पर सीधे दोबारा टेस्ट देने का रास्ता बंद कर दिया गया है। नई व्यवस्था के...

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11:25 AM, August 21, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले वाहन चालकों के लिए अब ड्राइविंग टेस्ट में लापरवाही भारी पड़ सकती है। परीक्षा में फेल होने पर सीधे दोबारा टेस्ट देने का रास्ता बंद कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत असफल आवेदक को पहले अनिवार्य प्रशिक्षण लेना होगा और इसके लिए करीब छह हजार रुपये शुल्क भी जमा करना पड़ेगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही दोबारा ड्राइविंग टेस्ट का मौका मिलेगा।
ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया में लागू की गई इस नई व्यवस्था का मकसद सड़क पर वाहन चलाने वाले चालकों की वास्तविक दक्षता सुनिश्चित करना और बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के बार-बार ड्राइविंग टेस्ट देने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। परिवहन विभाग का मानना है कि इससे प्रशिक्षित एवं कुशल वाहन चालक तैयार होंगे और सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
अब फेल हुए तो पहले प्रशिक्षण जरूरी -
अब तक ड्राइविंग टेस्ट में असफल होने के बाद निर्धारित शुल्क जमा कर आवेदक दोबारा परीक्षा में शामिल हो सकता था। नई व्यवस्था में यह प्रक्रिया बदल दी गई है। परीक्षा में फेल होने वाले आवेदक को पहले मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र पर प्रशिक्षण लेना होगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही दोबारा ड्राइविंग टेस्ट देने की अनुमति मिलेगी।
जिले में शासन की ओर से पीपीपी मॉडल पर मान्यता प्राप्त ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं परीक्षण केंद्र संचालित हैं। इनमें तेज सिंह प्रत्यायन चालक प्रशिक्षण केंद्र तथा सेफ रोड परीक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं। इन केंद्रों पर दोपहिया, चारपहिया और भारी वाहनों के प्रशिक्षण के साथ स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए परीक्षा की सुविधा उपलब्ध है।
छह हजार रुपये तक का पड़ेगा अतिरिक्त भार -
नई व्यवस्था के कारण ड्राइविंग टेस्ट में असफल होने वाले आवेदकों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। दोबारा परीक्षा देने से पहले प्रशिक्षण के लिए करीब छह हजार रुपये शुल्क जमा करना होगा। यानी परीक्षा में असफलता अब सिर्फ दोबारा टेस्ट की परेशानी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रशिक्षण के लिए अतिरिक्त समय और धन भी खर्च करना पड़ेगा।
सड़क पर दक्षता साबित करना जरूरी -
परिवहन विभाग के एआरटीओ कौशल कुमार सिंह के मुताबिक ड्राइविंग लाइसेंस महज एक दस्तावेज नहीं, बल्कि सड़क पर वाहन चलाने की जिम्मेदारी और चालक की दक्षता से जुड़ा प्रमाण है। इसलिए परीक्षा में सफल होने के लिए आवेदकों को निर्धारित प्रशिक्षण और ड्राइविंग मानकों की पूरी जानकारी होना जरूरी है।
विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के बार-बार ड्राइविंग टेस्ट देने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। इससे लाइसेंस जारी करने से पहले चालक की वास्तविक ड्राइविंग क्षमता सुनिश्चित होगी और सड़क पर दुर्घटनाओं के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी।
पोर्टल अपडेट नहीं तो फार्म-5 भी जरूरी -
एआरटीओ प्रशासन के अनुसार मोटर ट्रेनिंग स्कूल से फेल होने की स्थिति में संबंधित आवेदक को प्रशिक्षण लेना होगा। यदि प्रशिक्षण संबंधी आदेश पोर्टल पर अपडेट नहीं हुआ है तो आवेदक को फार्म-5 लेना पड़ेगा। विभाग की नई व्यवस्था के बाद अब लाइसेंस के लिए सिर्फ परीक्षा पास करना ही नहीं, बल्कि निर्धारित प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी करना भी अहम होगा।




