Sonbhadra News : अरावली पर्वत की तरह सोनभद्र की पहाड़ियों की किसी ने ली होती सुधि तो बन जाता स्विजरलैंड
वही सोनभद्र जिसे देखकर कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि यह स्थान देश का स्वीटजरलैंड बनेगा।

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6:00 PM, December 24, 2025
शान्तनु कुमार
इन दिनों पूरे देश में अरावली पर्वत को लेकर बहस चल रही है, चाहे वह राजनीतिक गलियारों में हो या फिर अदालत व सोशल मीडिया पर। इस पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ लगातार देखने व पढ़ने को मिल रहा है। बहस का मुख्य कारण इस बात पर हो रहा है कि एक मानक तय कर दिया गया कि 100 मीटर से कम ऊँचाई वाले पहाड़ अरावली की श्रेणी में नहीं आयेंगे और उसमें खनन कार्य हो सकता है।
अरावली निश्चित तौर पर देश की धरोहर व महत्वपूर्ण पहाड़ियों में शामिल है। मगर देश में ऐसी बहुत सी पहाड़िया हैं जो भले ही देश की धरोहर न हो मगर क्षेत्रीय स्तर पर वह पहाड़ काफी महत्व रखता है। मगर खनन माफियाओं की कुदृष्टि और सरकारी तंत्र की मिली भगत से उस पहाड़ी का अस्तित्व ही खत्म हो गया या यह भी कह सकते हैं कि खत्म होने के कगार पर है।
जी हाँ हम बात कर रहे हैं जनपद सोनभद्र की। वही सोनभद्र जिसे देखकर कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि यह स्थान देश का स्वीटजरलैंड बनेगा। इतना ही नहीं यूपी के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा था कि सोनभद्र में अकेले वह क्षमता है कि वह स्वीटजरलैंड बन सकता है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिस खूबसूरत दृश्य को देखकर पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने टिप्पणी की थी वह खूबसूरती तो अब धीरे-धीरे खत्म हो चली है। सोनभद्र में जंगल व पहाड़ों का ऐसा जाल था कि हर किसी को आकर्षित करता था। मगर समय के साथ कुछ विकास की राह में खत्म हो गए तो कुछ खनन नीति के कारण।
सरकारें किसी की भी रही हो पहाड़ों के साथ बहुत बुरा व्यवहार हुआ। खनन की आड़ में माफिया मिलीभगत कर पहाड़ों की ऐसी दुर्दशा की कि पूरे सोनभद्र व आस-पास के इलाकों में पर्यावरण को बहुत नुक्सान पहुंचा। खनन इलाकों में तो जहरीला हवा पूरे साल भर लोगों के जीवन में जहर घोल रहा है। इतना ही नहीं इन इलाकों में तमाम बीमारियों के कारण लोगों की उम्र भी कम होती जा रही है। जंगल व पहाड़िया कटने से मानसून को भी बड़ा नुक्सान पहुंचा है। यही कारण है कि जनपद में खेती भी चौपट होती जा रही है और लोग अब खेती से दूर भाग रहे हैं। एक तरफ अरावली पर्वत की ऊँचाई कम होने पर पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ गयी है तो वहीं सोनभद्र में तो खनन माफिया सिंडिकेट बनाकर धरातल को भी नहीं बख्शा। यही कारण है कि सोनभद्र के कई इलाके डार्क जोन में चले गए हैं, जहाँ पानी ही नहीं है।
ऐसे में जरूरत है यहाँ भी पर्यावरण विदों को जागने की ताकि यहाँ पर्यावरण संतुलन बना रहे और जनपद सोनभद्र एक बार फिर स्वीटजरलैंड बन सके।




