Sonbhadra News : एक चिंगारी और मच सकता है कोहराम, सुरक्षा जांच में खुली बड़ी पोल
जिले में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत बेहद भयावह तस्वीर पेश कर रही है। अग्निशमन विभाग के आंकड़े ही बता रहे हैं कि जिले में संचालित 60 होटल और रेस्टोरेंट में से सिर्फ 26 के पास वैध फायर.......

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sonbhadra
9:36 PM, June 4, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• एनओसी के बिना धड़ल्ले से चल रहे होटल-रेस्टोरेंट
• 60 में सिर्फ 26 प्रतिष्ठानों के पास अग्निशमन एनओसी, 34 पर नियमों की खुली अनदेखी, जबकि सैकड़ों प्रतिष्ठान विभाग की नजरों से बाहर
• क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?
सोनभद्र । जिले में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत बेहद भयावह तस्वीर पेश कर रही है। अग्निशमन विभाग के आंकड़े ही बता रहे हैं कि जिले में संचालित 60 होटल और रेस्टोरेंट में से सिर्फ 26 के पास वैध फायर एनओसी है, जबकि कई नामचीन सहित 34 प्रतिष्ठान खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज इन 60 प्रतिष्ठानों के अलावा जिले में सैकड़ों होटल, लॉज, गेस्ट हाउस, बैंक्वेट हॉल और रेस्टोरेंट संचालित हैं, जिनकी सुरक्षा व्यवस्था का कोई ठोस रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यदि कहीं आग लगने की बड़ी घटना हो जाए तो दर्जनों नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।
दिल्ली के रेस्त्रां अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन सोनभद्र में हालात अब भी जस के तस हैं। कई नामचीन होटल और रेस्टोरेंट ऐसे हैं जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की आवाजाही होती है, लेकिन वहां न पर्याप्त अग्निशमन यंत्र हैं, न आपातकालीन निकास मार्ग और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। अधिकांश प्रतिष्ठानों में अग्निशमन यंत्र सिर्फ दीवारों की शोभा बढ़ा रहे हैं, आपातकालीन निकास मार्ग नदारद हैं और कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति से निपटने का कोई प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया है। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार होटल और रेस्टोरेंट के रसोईघर सबसे संवेदनशील क्षेत्र होते हैं, जहां एलपीजी गैस, विद्युत उपकरण और ज्वलनशील सामग्री हर समय मौजूद रहती है। ऐसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संचालित प्रतिष्ठानों में आग लगने की स्थिति में नुकसान कई गुना बढ़ सकता है।
जिले के अधिकांश होटल, रेस्टोरेंट, लॉज और गेस्ट हाउस आग से बचाव के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। कुछ चुनिंदा प्रतिष्ठानों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर स्थानों पर अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। कई भवनों में न तो आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं और न ही आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रभावी व्यवस्था। नियमों के अनुसार होटल और रेस्टोरेंट संचालित करने से पहले भवन के नक्शे के अनुरूप अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। बावजूद इसके कई प्रतिष्ठान नियम-कायदों को दरकिनार कर संचालित हो रहे हैं। ऐसे हालात में यदि आग लगने जैसी घटना होती है तो बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी श्रीराम साहनी ने बताया कि "जनपद में समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाकर रेस्टोरेंट व होटलों में उपकरणों को परखा जाता है। एनओसी और पर्याप्त उपकरण नहीं मिलने पर नोटिस भी दिए जाते हैं। आज भी सात होटलों की जांच की गई, जहां एनओसी और उन्हें आगजनी के दौरान ।"




