Sonbhadra News : हिंडालको की रामलीला का शुभारंभ, नारद मोह प्रसंग का हुआ मंचन
पहले दिन मंचन की शुरुआत नारद मुनि की घोर तपस्या से हुई। नारद मुनि की तपस्या से भयभीत इंद्रदेव ने उसे भंग करने के लिए कामदेव को भेजा, लेकिन कामदेव को सफलता नहीं मिली।

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4:21 PM, October 12, 2026
मनोज वर्मा (संवाददाता)
० नौ दिनों तक चलेगी रामलीला
० रावण के अत्याचार से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु ने लिया अवतार का संकल्प
रेनुकूट (सोनभद्र)। आस्था, भक्ति और भारतीय संस्कृति की परंपरा को जीवंत करते हुए हिंडालको रामलीला परिषद की ओर से 61वें रामलीला महोत्सव का शुभारंभ हुआ। पहले दिन नारद मोह प्रसंग से लेकर रावण के अत्याचार और भगवान विष्णु के अवतार लेने के संकल्प तक की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से अहंकार, मोह-माया और अधर्म के परिणामों को दर्शाया। नौ दिनों तक चलने वाली रामलीला को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।
रामलीला का शुभारंभ हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड, रेनुकूट के मुखिया समीर नायक और क्लस्टर हेड एचआर जसबीर सिंह ने गणेश पूजन के साथ किया। इस दौरान उन्होंने रामलीला मंचन के शुभारंभ पर सभी को हार्दिक बधाई दी और आयोजन की सफलता की कामना की।
पहले दिन मंचन की शुरुआत नारद मुनि की घोर तपस्या से हुई। नारद मुनि की तपस्या से भयभीत इंद्रदेव ने उसे भंग करने के लिए कामदेव को भेजा, लेकिन कामदेव को सफलता नहीं मिली। इसके बाद नारद मुनि को अपनी काम-विजय पर अभिमान हो गया। भगवान विष्णु ने उनके अहंकार को दूर करने के लिए मोह-माया की लीला रची। इसी क्रम में नारद मुनि राजा शीलनिधि की कन्या से विवाह करने के लिए भगवान विष्णु से सुंदर रूप मांगते हैं, लेकिन उन्हें वानर का रूप मिल जाता है। विवाह में असफल होने और अपनी स्थिति का पता चलने पर नारद मुनि क्रोधित हो जाते हैं तथा भगवान विष्णु को मनुष्य रूप में जन्म लेने का श्राप दे देते हैं।
इसके बाद रावण, कुंभकरण और विभीषण की तपस्या का प्रसंग मंचित किया गया। ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करने के बाद रावण अत्याचारी बन जाता है। वह देवताओं, साधु-संतों और पृथ्वी पर रहने वाले लोगों को प्रताड़ित करने लगता है। रावण के अत्याचारों से त्रस्त पृथ्वी की पुकार सुनकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचते हैं और उनसे रक्षा की प्रार्थना करते हैं। इस पर भगवान विष्णु मनुष्य रूप में अवतार लेकर रावण का वध करने का संकल्प लेते हैं।
रामलीला के इस मंचन ने दर्शकों को धर्म और अधर्म के संघर्ष की कथा से परिचित कराया। आगामी दिनों में रामकथा के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।




