Sonbhadra News : कागजों में चल रही 'हर घर नल' योजना, वनवासी आज भी नाले का पानी पीने को मजबूर
सरकार भले ही "हर घर नल" और "जल जीवन मिशन" की सफलता के दावे कर रही हो, लेकिन सोनभद्र के सुदूर वनवासी क्षेत्रों की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच सोमा ग्राम पंचायत....

पीने के पानी को लेकर प्रदर्शन करते सोमा के ग्रामीण.....
sonbhadra
2:18 PM, June 10, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• सोमा ग्राम पंचायत में संघर्ष मोर्चा की जन चौपाल, पेयजल संकट पर फूटा ग्रामीणों का आक्रोश
• करोड़ों खर्च के बावजूद बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग, आंदोलन की चेतावनी
सोनभद्र । सरकार भले ही "हर घर नल" और "जल जीवन मिशन" की सफलता के दावे कर रही हो, लेकिन सोनभद्र के सुदूर वनवासी क्षेत्रों की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच सोमा ग्राम पंचायत के ग्रामीण आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रहे हैं और नाले-तालाब का पानी छानकर पीने को मजबूर हैं। इसी गंभीर समस्या को लेकर किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा द्वारा आयोजित जन चौपाल में ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया।
किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के "पेड़ है तो प्राण है" अभियान के तहत आयोजित जन चौपाल में पर्यावरण संरक्षण, वन संपदा संवर्धन, तेंदुआ सफारी और कृषि वानिकी विश्वविद्यालय जैसे विषयों पर चर्चा हुई, लेकिन ग्रामीणों के दर्द का सबसे बड़ा मुद्दा पेयजल संकट बनकर उभरा।
ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद गांवों तक स्वच्छ पेयजल नहीं पहुंच सका है। हालात इतने बदतर हैं कि लोग आज भी नालों, झरनों और तालाबों के पानी को कपड़े से छानकर पीने को मजबूर हैं। दूषित पानी के सेवन से ग्रामीणों में बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद नहीं टूट रही।
जन चौपाल में मौजूद किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब सरकार जलापूर्ति योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तब भी वनवासी क्षेत्रों के लोग स्वच्छ पानी के लिए भटक रहे हैं, यह शासन और प्रशासन दोनों की गंभीर विफलता है।
उन्होंने मौके पर ही जिलाधिकारी और जल निगम के अधिकारियों से वार्ता कर स्थिति से अवगत कराया तथा तत्काल समाधान की मांग की। संदीप मिश्रा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही सोमा ग्राम पंचायत में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ग्रामीणों के साथ मिलकर जिला मुख्यालय पर बड़ा जन आंदोलन करेगा।
उन्होंने कहा कि विकास की असली तस्वीर गांवों में दिखाई देती है और यदि आजादी के इतने वर्षों बाद भी वनवासी परिवारों को स्वच्छ पानी नसीब नहीं हो रहा है तो यह व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। ग्रामीणों ने भी चेतावनी दी कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम चाहिए।
पानी के लिए संघर्ष, जवाबदेही से बचते जिम्मेदार -
सोमा ग्राम पंचायत की तस्वीर यह सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर करोड़ों रुपये की जल योजनाओं का लाभ किसे मिला? यदि गांव के लोग आज भी नाले और तालाब का पानी पीने को मजबूर हैं तो योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
ये रहे मौजूद -
इस अवसर पर आकाश चौहान, शत्रुघ्न बिंद, विजय चौहान, बिंदु खरवार, मुखलाल चेरो, सुष्मिता धनगर, दिनेश चेरो, नागेंद्र धनगर, आकाश, राज, राधा, कन्हैया लाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।




