Sonbhadra News : मच्छरों के आगे सरकारी दावे पस्त, जिले में 24 घंटे में मिले मलेरिया के 24 मरीज, हड़कंप
चार राज्यों की सीमाओं से घिरे जनपद सोनभद्र में मलेरिया ने एक बार फिर तेजी से पांव पसारना शुरू कर दिया है। मलेरिया से बचाव और रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग तथा मलेरिया विभाग की ओर से लगातार अभियान.....

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sonbhadra
9:52 PM, August 20, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• जनपद में मच्छरों के आतंक ने 'मलेरिया मुक्त' दावे की खोली पोल
सोनभद्र । चार राज्यों की सीमाओं से घिरे जनपद सोनभद्र में मलेरिया ने एक बार फिर तेजी से पांव पसारना शुरू कर दिया है। मलेरिया से बचाव और रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग तथा मलेरिया विभाग की ओर से लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद बढ़ते मरीजों ने विभागीय तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि वर्ष 2026 तक सोनभद्र को मलेरिया मुक्त करने का दावा किया जा रहा था, लेकिन अब सामने आ रहे मामले इस दावे की जमीनी हकीकत पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
गुरुवार को सीएचसी चोपन में मलेरिया के 22 संभावित मरीज मिलने से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। वहीं नगवां और घोरावल क्षेत्र में भी एक-एक मरीज मिलने की बात सामने आई है। जबकि जनवरी से अब तक 151 मलेरिया के मरीज सामने आ चुके हैं। एक ही दिन में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर इतने संभावित मरीजों के सामने आने से जिले में मलेरिया संक्रमण की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
निजी पैथोलॉजी के आंकड़े और सरकारी रिकॉर्ड में अंतर -
मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच सरकारी आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों की मानें तो जिले के निजी पैथोलॉजी सेंटरों में मलेरिया की जांच कराने वाले मरीजों की संख्या प्रतिदिन 50 के पार पहुंच रही है। इसके विपरीत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के आंकड़े काफी कम दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि यदि निजी जांच केंद्रों पर इतने मरीज सामने आ रहे हैं तो उनका वास्तविक आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड में कितना है?
यदि निजी पैथोलॉजी सेंटरों के आंकड़े गलत हैं तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि आंकड़े सही हैं तो उन्हें सरकारी निगरानी व्यवस्था में शामिल क्यों नहीं किया जा रहा? आंकड़ों के इस कथित अंतर ने मलेरिया नियंत्रण अभियान की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मलेरिया मुक्त अभियान की खानापूर्ति या बीमारी पर नियंत्रण का प्रयास, एक बड़ा सवाल -
मलेरिया विभाग हर वर्ष बरसात से पहले और बरसात के दौरान मच्छर नियंत्रण अभियान चलाने का दावा करता है। विभाग की ओर से मच्छररोधी अभियान, एंटी लार्वा छिड़काव, फॉगिंग और लोगों को जागरूक करने के दावे लगातार किए जाते रहे हैं। विभाग का लक्ष्य भी वर्ष 2026 तक जिले को मलेरिया मुक्त करने का रहा है लेकिन बारिश के मौसम में मलेरिया के संभावित मरीजों की संख्या बढ़ना इस अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा कर रहा है। जिले के वन और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में यदि समय रहते मलेरिया की रोकथाम नहीं की गई तो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सवाल बढ़े तो स्वास्थ्य विभाग ने साधी चुप्पी -
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने पूरे मामले पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। न बढ़ते मरीजों के आंकड़ों पर कोई स्पष्ट जवाब मिला और न ही वर्ष 2026 तक मलेरिया मुक्त सोनभद्र के लक्ष्य की मौजूदा स्थिति बताई गई।




