"जिले का बड़ा हिस्सा वन और ग्रामीण क्षेत्रों में आता है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं और जांच तक पहुंच आज भी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में मलेरिया जैसे संक्रामक रोग के बढ़ते मामलों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। एक तरफ मलेरिया मुक्त सोनभद्र का दावा और दूसरी तरफ अस्पतालों में बढ़ते संभावित मरीज इन दोनों तस्वीरों के बीच अब स्वास्थ्य विभाग को जनता के सामने वास्तविक आंकड़े रखने होंगे।यहीं नहीं विभाग द्वारा एंटी लार्वा का छिड़काव, फॉगिंग, जागरूकता अभियान और निगरानी व्यवस्था की बातें भी सामने आती हैं लेकिन सवाल यह है कि यदि अभियान वास्तव में जमीन पर प्रभावी हैं तो मलेरिया के मामले फिर क्यों बढ़ रहे हैं? क्या विभाग की निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या संवेदनशील इलाकों में समय रहते छिड़काव और फॉगिंग नहीं हुई? क्या मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों की सही पहचान ही नहीं हो पा रही है? सिर्फ अभियान चलाने के दावे और कागजी रिपोर्ट से मलेरिया खत्म नहीं होगा। ऐसे में जरूरत है कि विभाग जमीन पर उतरकर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करे, जांच बढ़ाए और वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे।"