दिलीप श्रीवास्तव/प्रकाश खत्री (संवाददाता)
चुर्क। शुक्रवार के प्रात काल महिलाओं ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर 4 दिन से चल रहे लोक आस्था के महापर्व छठ व्रत का समापन किया गया विभिन्न घाटों पर बड़ी संख्या में व्रतियों और श्रद्धालुओं ने सूर्यदेव को अर्घ्य दिया और छठी मैया से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की मन्नत भी मांगी। व्रतियों व उनके स्वजन ने भगवान सूर्य से समाज व देश के हित की कामना की नहाय-खाय से शुरू हुआ यह चार दिवसीय पर्व चुर्क नगर एवं चुर्क क्षेत्र के तालाबों पर व्रती महिलाएं रात भर रुक कर भजन जागरण किया फिर सुबह उगते हुए सूर्य को अर्थ देकर छठ पर्व की पूणाहुति किया नगर पंचायत चुर्क-घुर्मा चेयरमैन मीरा यादव के द्वारा चाय जलपान आदि कि व्यवस्था किया गया था जगह- जगह छठ घाटों पर सजावट की व्यवस्था की गई थी लोगों को सेल्फी लेने के लिए सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया था बच्चों के लिए जंपिंग झूला भी लगाया गया था विभिन्न छठ घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था में चुर्क चौकी प्रभारी सुनील कुमार ने पुलिस तैनात की थी व्रतियों ने 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद पारण किया पंडित दिवाकर तिवारी ने बताया कि छठ पर्व पर सूर्यदेव और उनकी बहन छठी मैया की उपासना का बहुत महत्व है। छठ का व्रत काफी कठिन माना जाता है। 36 घंटे निर्जला व्रत रखने के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह पूर्ण हो जाता है। यह व्रत परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है कुछ छठ व्रती महिलाएं रात भर छठ घाट पर ही बैठी रही तथा कुछ शुक्रवार तड़के तीन बजे से ही व्रतियों ने घाटों पर पहुंचकर सूर्य देवता और छठी मैया की उपासना शुरू कर दी थी। इसके बाद सूर्योदय होते ही अर्घ्य देने का सिलसिला शुरू हो गया। पूजा स्थल के नजदीक बज रहे छठ गीतों पर जहां युवा थिरकते नजर आए, वहीं बच्चों ने आतिशबाजी की चार दिनों तक चलने वाले छठ पूजा का महापर्व पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया गया। छठ पर्व के आखिरी दिन शुक्रवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह महापर्व संपन्न हो गया इस दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सभी श्रद्धालु घाटों से अपने घरों की तरफ लौट गए उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ आस्था और संस्कार के पर्व छठ का समापन होता है। उगते सूरज को अर्घ्य देने के लिए आज शुक्रवार तड़के से ही छठ घाटों पर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में दो बार सूर्य का अर्घ्य दिया जाता है। पहला अर्घ्य षष्ठी तिथि के दिन डूबते सूर्य को दिया जाता है, जबकि दूसरा अर्घ्य सप्तमी तिथि को उदय होने वाले भगवान भास्कर को दिया जाता है। नदी, तालाब और नहरों पर बने छठ घाटों के पानी में उतरकर महिलाओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया सप्तमी तिथि के दिन छठ घाट पर पानी में खड़े होकर श्रद्धालुओं द्वारा उगते हुए सूर्य को जल दिया जाता है अपनी मनोकामनाओं के लिए भगवान से प्रार्थना की जाती है। इस बार आठ नवंबर यानी शुक्रवार को उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया गया, जिसके साथ ही इस महापर्व का समापन हो गया।लोग घाटों पर सूर्य की तरफ हाथ जोड़कर अर्घ्य देते नजर आए श्रद्धालुओं द्वारा उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व समाप्त होता है और इसके बाद छठ का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। व्रतियों ने गन्ने के बीच में मिट्टी के हाथी जो भगवान गणेश के रूप में होते हैं व कलशी रखा, गन्ने के पास मिट्टी के बर्तन में प्रसाद रखकर दीप जलाया और इसके साथ ही व्रत और उपवास संपन्न होता है।