Sonbhadra News : आजादी के 80 वर्ष बाद भी पक्की सड़क को तरस रहा घघरी, विकास के दावों की खुली पोल
देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना चुका है, लेकिन सोनभद्र के घघरी क्षेत्र के हजारों ग्रामीण आज भी पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। घघरी से बभनी मुख्य संपर्क जंगल मार्ग की........

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sonbhadra
11:19 AM, August 20, 2026
राजेश कुमार (संवाददाता)
बभनी । देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना चुका है, लेकिन सोनभद्र के घघरी क्षेत्र के हजारों ग्रामीण आज भी पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। घघरी से बभनी मुख्य संपर्क जंगल मार्ग की बदहाली ने जिले में विकास के दावों की कलई खोल दी है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर बुधवार को ग्रामीणों ने उमा प्रसाद उर्फ उमंग गुप्ता के नेतृत्व में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और जिम्मेदारों के खिलाफ जमकर आवाज बुलंद की।
ग्रामीणों का आक्रोश सिर्फ सड़क को लेकर नहीं है, बल्कि वर्षों से समस्या उठाए जाने के बावजूद समाधान नहीं होने को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत, ज्ञापन, धरना और अधिकारियों से गुहार के बाद भी सड़क का मुद्दा वहीं खड़ा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हजारों लोगों की जिंदगी से जुड़ी सड़क का मामला वर्षों से सामने है तो जिम्मेदार विभाग और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि आखिर कब जागेंगे?
दो किलोमीटर सड़क के लिए वर्षों से संघर्ष, फिर भी जिम्मेदार बेखबर -
घघरी पुनर्वास स्थापना के दशकों बाद भी घघरी-बभनी का करीब दो किलोमीटर मुख्य संपर्क मार्ग पक्की सड़क से वंचित है। ग्रामीणों के अनुसार इस मार्ग से तीन हजार से अधिक लोगों की आवाजाही होती है। यही रास्ता ब्लॉक मुख्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, इंटर कॉलेज और थाना क्षेत्र को जोड़ता है।
सड़क के अभाव में मरीजों, विद्यार्थियों, किसानों और आम ग्रामीणों को 15 से 20 किलोमीटर तक अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। बारिश के दिनों में रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी किसी चुनौती से कम नहीं रहता।
आईजीआरएस की समयसीमा भी बीती, PWD की चुप्पी बरकरार -
समस्या के समाधान के लिए स्थानीय युवा उमा प्रसाद उर्फ उमंग गुप्ता ने जनसुनवाई (आईजीआरएस) पोर्टल पर संदर्भ संख्या 40020026014048 के तहत शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के निस्तारण की निर्धारित समयसीमा 17 अगस्त थी, लेकिन समयसीमा बीतने के बाद भी अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड सोनभद्र की ओर से पोर्टल पर कोई निस्तारण आख्या अपलोड नहीं की गई।
यह स्थिति सरकार के समयबद्ध शिकायत निस्तारण और जीरो टॉलरेंस के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि जब ऑनलाइन शिकायत की निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं हो रहा है तो जमीनी समस्या के समाधान की उम्मीद कैसे की जाए?
दो बार धरना, दर्जनों ज्ञापन फिर भी नहीं निकला समाधान -
घघरी-बभनी सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीण पहले भी दो बार व्यापक धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपे गए और लगातार पत्राचार किया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय पेंच और टालमटोल ने सड़क निर्माण को वर्षों से लटका रखा है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी ग्रामीणों का फूटा गुस्सा -
सड़क की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय गांव-गांव पहुंचकर विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद वर्षों पुरानी बुनियादी समस्याओं की सुध लेने वाला कोई नहीं दिखता।
ग्रामीणों का आरोप है कि घघरी-बभनी सड़क जैसे गंभीर जनहित के मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों की अपेक्षित सक्रियता नजर नहीं आई। यदि जनप्रतिनिधि लगातार शासन और विभाग पर दबाव बनाते तो शायद दो किलोमीटर सड़क के लिए ग्रामीणों को बार-बार सड़क पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती। ग्रामीणों का यह सवाल अब चर्चा में है कि जब जनप्रतिनिधि ही जनता की बुनियादी जरूरतों को लेकर मुखर नहीं होंगे तो आखिर ग्रामीण अपनी आवाज किसके सामने उठाएं?
विकास की चमकदार तस्वीर के सामने सड़क की बदहाली बनी सवाल -
सोनभद्र में विकास की बड़ी-बड़ी परियोजनाओं और योजनाओं के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन घघरी-बभनी का रास्ता उन दावों की जमीनी तस्वीर सामने रख रहा है। एक तरफ आजादी के 80 वर्ष पूरे होने का जश्न है, दूसरी तरफ हजारों ग्रामीण दो किलोमीटर पक्की सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास का असली पैमाना गांव की सड़क, अस्पताल तक पहुंच और बच्चों की सुगम आवाजाही है। यदि इन बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जनता को आंदोलन करना पड़े तो विकास के दावों की हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
वहीं ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्यवाही नहीं हुई तो ग्रामीणों के साथ बैठक कर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।




