Sonbhadra News : छह माह से जनरेट नहीं हुए ई-वाउचर, गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड ठप
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को निजी सेंटरों पर निःशुल्क रूप से अल्ट्रासाउंड कराने की व्यवस्था फिलहाल ठप है। करीब छः माह से सीएचसी-पीएचसी पर जांच के लिए पहुंच रहीं....

फ़ाइल फोटो....
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10:24 PM, January 8, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को निजी सेंटरों पर निःशुल्क रूप से अल्ट्रासाउंड कराने की व्यवस्था फिलहाल ठप है। करीब छः माह से सीएचसी-पीएचसी पर जांच के लिए पहुंच रहीं गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। ऐसा इसीलिए है कि शासन स्तर से निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर को किए जाने वाले भुगतान की व्यवस्था बंद कर दी गई है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर गर्भवती महिलाओं को जांच कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। निजी सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड कराने में अच्छी खासी धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। हर माह 3500-4000 गर्भवती महिलाएं इससे प्रभावित हो रही हैं।
दो वर्ष पूर्व शासन ने शुरू किया था ई-वाउचर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं का निःशुल्क अल्ट्रासाउंड -
जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड की समुचित व्यवस्था नहीं है और जहाँ है भी वहाँ रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासॉउन्ड नहीं हो पाता, इसलिए गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए निजी सेंटरों पर जांच करानी पड़ती थी। आर्थिक रूप से कमजोर गर्भवती महिलाओं को राहत देने के लिए शासन ने करीब दो साल पहले ई-वाउचर के माध्यम से अल्ट्रासाउंड पर खर्च होने वाले रुपये वहन करना शुरू किया। महिलाओं के अल्ट्रासाउंड तो निजी सेंटरों पर होते थे लेकिन शासन की तरफ से एक अल्ट्रासाउंड पर 425 रुपये का ई-वाउचर जनरेट कर भुगतान किया जा रहा था।
अगस्त से नहीं हो रहा गर्भवतियों का अल्ट्रासॉउन्ड -
जिले भर में हर माह 3500 से 4000 निःशुल्क अल्ट्रासाउंड हो रहे थे। इस बीच शासन ने भुगतान के लिए स्पर्श पोर्टल शुरू कर दिया, विभागीय अधिकारियों की उदासीनता की वजह से स्पर्श पोर्टल का संचालन ढंग से नहीं हो पाया और 16 अगस्त 2025 से भुगतान ठप हो गया। इस बीच नवंबर माह से बजट रोक दिया गया। ऐसे में जिले की करीब 31457 गर्भवती महिलाओं के अब निःशुल्क अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं।
17066 गर्भवतियों को ही मिल सका लाभ -
जिले में अभी तक करीब 48523 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया है। इसमें प्रथम तिमाही के अंतर्गत लगभग 31457 महिलाएं हैं जिनमें 17066 महिलाओं का ही निःशुल्क अल्ट्रासाउंड हुआ जबकि, अन्य महिलाओं के लिए विभागीय पोर्टल से अल्ट्रासाउंड कराने के लिए ई-रुपी वाउचर जनरेट नहीं हुए। चिंह्नित सेंटरों ने ऐसे में निःशुल्क अल्ट्रासाउंड बंद कर दिया और अब महिलाओं को खुद के खर्च पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
निजी सेंटरों पर 1000 से 1400 रुपये तक होते हैं खर्च -
निःशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए ई-वाउचर जनरेट होना बंद होने से गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासांउड कराने के लिए निजी सेंटरों पर जाना पड़ रहा है। वहां अधिक धनराशि खर्च करनी पड़ती है। निजी सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड कराने में 1000 से 1400 रुपये खर्च हाेते हैं। वहीं, अस्पताल में अल्ट्रासांउड पर धनराशि व्यय नहीं करनी पड़ती। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हो रही है।
क्या बोले जिम्मेदार -
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 पंकज कुमार राय ने बताया कि "योजना पर शासन से बजट जारी नहीं किया जा रहा है। धनराशि न मिलने से अगस्त से निःशुल्क वाउचर जनरेट नहीं हुए हैं। मामले के बारे में उच्चाधिकारियों को जानकारी है। शासन से दिशा-निर्देश आने पर ही महिलाओं को लाभांन्वित किया जाएगा।"



