Sonbhadra News : ढाई महीने तक जांच शुरू न होने पर डीएम सख्त, सीडीओ को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का दिया निर्देश
रॉबर्ट्सगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत अरंगी में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच कराए गए विकास कार्यों में कथित अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत की जांच ढाई महीने बाद भी शुरू नहीं....

sonbhadra
9:15 PM, August 25, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• अरंगी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की शिकायत का मामला
• जांच अधिकारी की कार्यशैली पर उठे सवाल, फरियादी ने डीएम के सामने रखी पूरी शिकायत
सोनभद्र । रॉबर्ट्सगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत अरंगी में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच कराए गए विकास कार्यों में कथित अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत की जांच ढाई महीने बाद भी शुरू नहीं होने का मामला अब जिलाधिकारी के दरबार तक पहुंच गया है। मंगलवार को शिकायतकर्ता अशोक कुमार ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर जांच अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए शिकायत की। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया और मुख्य विकास अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
ये था प्रकरण -
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसने 3 जून 2026 को ग्राम पंचायत अरंगी में कराए गए विकास कार्यों में कथित अनियमितता और सरकारी धन के गबन की शिकायत जिलाधिकारी से की थी। शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए समिति गठित कर जांच की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी को सौंपी गई थी। अधिकारियों की ओर से जांच के दौरान शिकायत में उल्लिखित प्रत्येक बिंदु की स्थलीय, अभिलेखीय एवं तकनीकी जांच कर स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए थे।
लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि ढाई महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर जांच तक शुरू नहीं की। इसको लेकर वह लगातार अधिकारियों के चक्कर काटता रहा। जांच के संबंध में जानकारी लेने पर उसे कभी अभिलेख उपलब्ध नहीं होने तो कभी अन्य औपचारिकताओं का हवाला दिया जाता रहा। इससे शिकायतकर्ता में नाराजगी बढ़ती गई।
डीएम के सामने फूटा शिकायतकर्ता का दर्द -
मंगलवार को शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। उसने बताया कि शिकायत के बाद जांच के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद संबंधित जांच अधिकारी द्वारा अब तक जांच शुरू नहीं की गई है। शिकायतकर्ता ने जांच में जानबूझकर देरी किए जाने की आशंका जताते हुए मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बाद ग्राम प्रधान, उनके पति और पंचायत सचिव की ओर से शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है तथा धमकियां दी जा रही हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
डीएम ने दिखाई सख्ती, सीडीओ को मिली जिम्मेदारी -
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिया कि प्रकरण की जांच एक सप्ताह के भीतर पूरी कराकर जांच आख्या प्रस्तुत की जाए। डीएम के इस रुख के बाद लंबे समय से लंबित चल रहे मामले में अब कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
सवालों के घेरे में जांच अधिकारी की कार्यशैली -
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायत पर जांच समिति गठित कर जांच के निर्देश दिए गए थे, तो ढाई महीने तक जांच शुरू क्यों नहीं हुई? यदि पंचायत से अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए थे तो संबंधित जिम्मेदारों से अभिलेख तलब करने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या सरकारी धन से जुड़े आरोपों की जांच में इतनी लंबी देरी उचित है?




