Sonbhadra News : घटता भूजल स्तर बना खतरे की घंटी, जल संरक्षण को लेकर तीन दिवसीय अभियान शुरू
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित भूजल सप्ताह के अंतर्गत सोमवार को 'घटता भूजल स्तर : कारण एवं निवारण' विषय पर आधारित तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ गुरु नानक बालिका इंटर कॉलेज.............

भूजल संरक्षण को लेकर अभियान का शुभारंभ करते अतिथिगण......
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4:28 PM, July 20, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित भूजल सप्ताह के अंतर्गत सोमवार को 'घटता भूजल स्तर : कारण एवं निवारण' विषय पर आधारित तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ गुरु नानक बालिका इंटर कॉलेज, रॉबर्ट्सगंज में हुआ। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग, क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई वाराणसी एवं क्षेत्रीय अभिलेखागार वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, पर्यावरण संरक्षण तथा पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों ने विस्तार से अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद पुरातत्व विभाग के आलोक रंजन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आईएचडब्ल्यू उत्तर प्रदेश के वाइस प्रेसिडेंट डॉ0 कुसुमाकर श्रीवास्तव, मुख्य अतिथि एवं इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी, मुख्य वक्ता रवि प्रकाश चौबे, विशिष्ट अतिथि अजीत कुमार सिंह, भू-तत्वविद दिवाकर श्रीवास्तव, गुरु नानक बालिका इंटर कॉलेज के प्रबंधक जसवीर सिंह तथा आकाशवाणी ओबरा के सौरभ तिवारी को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। अतिथियों ने पुरातात्विक धरोहरों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
मुख्य अतिथि दीपक कुमार केसरवानी ने कहा कि "जिले की बेलन, घघर और कर्मनाशा जैसी जीवनदायिनी नदियां इस क्षेत्र की पहचान हैं। इन नदियों से जुड़े प्राकृतिक जंगल, प्राचीन गुफाएं, शैलचित्र और ऐतिहासिक धरोहरें हमारी अमूल्य विरासत हैं। उन्होंने कहा कि यदि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर वर्षा चक्र को संतुलित बनाने का आह्वान किया।"
मुख्य वक्ता रवि प्रकाश चौबे ने कहा कि "जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से घरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग अपनाने, वर्षा जल संचयन के लिए गड्ढे बनाने तथा दैनिक जीवन में पानी की बर्बादी रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर भी जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।"
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ0बकुसुमाकर श्रीवास्तव ने कहा कि "पारंपरिक जल स्रोतों- तालाब, कुएं और पोखरों को पुनर्जीवित किए बिना भूजल स्तर में सुधार संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आज पुराने तालाबों और जलाशयों पर अतिक्रमण होने से प्राकृतिक जल पुनर्भरण की प्रक्रिया बाधित हो रही है। इसलिए सभी सरकारी और निजी भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए।"
भू-तत्वविद दिवाकर श्रीवास्तव ने भूजल संकट के वैज्ञानिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अनियंत्रित दोहन और भू-गर्भीय संरचनाओं की अनदेखी के कारण जल स्तर लगातार गिर रहा है। वैज्ञानिक जल प्रबंधन और वर्षा जल को पुनः भू-गर्भ तक पहुंचाने के सुनियोजित प्रयास ही इस संकट का स्थायी समाधान हैं।
विशिष्ट अतिथि अजीत कुमार सिंह ने कहा कि "पृथ्वी पर जल की पर्याप्त उपलब्धता होने के बावजूद स्वच्छ पेयजल का संकट लगातार गहराता जा रहा है। इसके लिए मानव की लापरवाही और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन जिम्मेदार है। उन्होंने सभी से 'जल है तो कल है' के संदेश को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।"
कार्यक्रम के समापन पर कॉलेज की छात्राओं एवं शिक्षकों ने जल संरक्षण की शपथ ली। छात्राओं ने जल संरक्षण पर आधारित गीत एवं नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर लोगों को जल बचाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में रूपेश कुमार झा, आशुतोष कुमार, दिनेश कुमार, हरिभजन सिंह, किरण सिंह, अनुपमा सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।




