Sonbhadra News : कमीशन, रेफरल, डेथ, अस्पताल सीज, FIR दर्ज... लेकिन प्रसूता की मौत का असली जिम्मेदार कौन?
कोन क्षेत्र में एक प्रसूता की ऑपरेशन के दौरान हुई मौत ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जिस निजी अस्पताल को पूर्व में अनियमितताओं के चलते सील किया जा चुका था, उसी अस्पताल.....

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6:40 PM, May 30, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । कोन क्षेत्र में एक प्रसूता की ऑपरेशन के दौरान हुई मौत ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जिस निजी अस्पताल को पूर्व में अनियमितताओं के चलते सील किया जा चुका था, उसी अस्पताल में कथित रूप से अवैध तरीके से मरीजों का इलाज जारी था। प्रसव के लिए भर्ती कराई गई महिला की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई, जबकि नवजात शिशु सुरक्षित है। घटना के बाद डॉक्टर और अस्पताल कर्मियों के मौके से गायब हो गए। वहीं घटना संज्ञान लेते हुए डीएम ने तत्काल एसडीएम ओबरा, निजी हॉस्पिटल पंजीयन नोडल अधिकारी, एसीएमओ और सीओ कोन को मौके पर भेजा। जहां टीम ने हॉस्पिटल को तत्काल सीज करते हुए संचालक के विरुद्ध FIR दर्ज कराया है।
क्या कमीशनखोरी ने ले ली एक मां की जान ?
बागेसोती क्षेत्र के सिंगा गांव निवासी सीमा देवी (38 वर्ष) पत्नी देवनारायण को शुक्रवार देर रात प्रसव पीड़ा होने पर उपचार के लिए ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि सबसे पहले वे कचनरवा पीएचसी पहुंचे थे, जहां तैनात एएनएम ने उन्हें सरकारी व्यवस्था के बजाय कोन स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर भेजने की सलाह दी। इसके बाद डायल-108 एम्बुलेंस के माध्यम से महिला को उक्त निजी अस्पताल पहुंचाया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचते ही ऑपरेशन का निर्णय लिया गया, जबकि मृतका के पहले चारों प्रसव सामान्य रूप से हो चुके थे। उनका कहना है कि पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सक और संसाधन न होने के बावजूद आर्थिक लाभ के उद्देश्य से ऑपरेशन किया गया, जिसके दौरान महिला की मौत हो गई।
मौत के बाद अस्पताल छोड़कर भागे डॉक्टर -
घटना के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों का आरोप है कि महिला की हालत बिगड़ते ही डॉक्टर और अस्पताल कर्मी मौके से चले गए। सुबह होते-होते बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन अस्पताल पहुंच गए तथा कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। इसके बाद एसडीएम ओबरा, एसीएमओ डॉ0 गुलाब शंकर यादव, डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद और सीओ कोन ने मौके का निरीक्षण किया।
एक साल पहले सील, फिर कैसे खुल गया अस्पताल ?
जांच के दौरान सामने आया कि ग्लोबल हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर बिना वैध पंजीयन के संचालित किया जा रहा था। प्रशासन ने तत्काल अस्पताल को सीज कर उसके प्रबंधक के विरुद्ध गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जिस अस्पताल पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी थी, वह दोबारा कैसे संचालित होने लगा? क्या स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यह प्रश्न अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
एएनएम और डायल 108 के ईएमटी पर हो कार्यवाही -
घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने मांग उठाई है कि केवल अस्पताल संचालक ही नहीं, बल्कि उस पूरी श्रृंखला की जांच होनी चाहिए जिसके माध्यम से मरीज को वहां तक पहुंचाया गया। परिजनों का कहना है कि यदि कचनरवा पीएचसी से मरीज को सरकारी अस्पताल या उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया जाता तो शायद स्थिति अलग होती। ऐसे में यह जांच का विषय है कि मरीज को निजी अस्पताल भेजने की सलाह किन परिस्थितियों में दी गई। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि डायल-108 एम्बुलेंस ने मरीज को किस आधार पर उस अस्पताल में पहुंचाया, जहां वैध संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि एएनएम, संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों तथा एम्बुलेंस सेवा से जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाए।
स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल -
यह घटना केवल एक अस्पताल की लापरवाही नहीं बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती है। यदि अवैध अस्पताल खुलेआम संचालित हो रहे थे तो जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे थे? यदि मरीजों को ऐसे अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा था तो इसकी जवाबदेही किसकी है?
सपा ने स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठाए सवाल -
इस बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व सदर विधायक अविनाश कुशवाहा ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक महिला की मौत का मामला नहीं, बल्कि जनपद की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते अवैध रूप से संचालित अस्पतालों पर प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो एक प्रसूता की जान नहीं जाती। उन्होंने कहा कि जिस अस्पताल को पहले सील किया जा चुका था, वहां दोबारा मरीजों का इलाज और ऑपरेशन होना प्रशासनिक एवं विभागीय विफलता को उजागर करता है। अविनाश कुशवाहा ने मांग की कि अस्पताल संचालक के साथ-साथ संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों, क्षेत्रीय स्वास्थ्यकर्मियों, एएनएम तथा मरीज को वहां तक पहुंचाने में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
पूर्व सदर विधायक अविनाश कुशवाहा ने कहा कि "एक मां की मौत किसी परिवार की निजी त्रासदी भर नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की असफलता का प्रमाण है। यदि सील अस्पताल में खुलेआम ऑपरेशन हो रहे थे तो स्वास्थ्य विभाग आखिर क्या कर रहा था? इस मामले में सिर्फ अस्पताल संचालक पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। मरीज को वहां तक पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क की जांच होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, एएनएम या एम्बुलेंस कर्मी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके विरुद्ध भी कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए। दोषियों को बचाने का कोई प्रयास नहीं होना चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।"




