Sonbhadra News : तेज बारिश में बहे प्रशासनिक निरीक्षण और बैठकों के दावे, फिर डूबा वाराणसी-शक्तिनगर राज्यमार्ग
दस साल से अधिक समय बीत गया, सड़क चौड़ी हो गई, फ्लाईओवर बन गया और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे भी होते रहे, लेकिन वाराणसी-शक्तिनगर राज्यमार्ग पर जलभराव की समस्या आज भी जस की तस है। सोमवार...

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1:04 PM, September 1, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । दस साल से अधिक समय बीत गया, सड़क चौड़ी हो गई, फ्लाईओवर बन गया और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे भी होते रहे, लेकिन वाराणसी-शक्तिनगर राज्यमार्ग पर जलभराव की समस्या आज भी जस की तस है। सोमवार से शुरू हुई तेज बारिश ने एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों और मानसून पूर्व किए गए दावों की हकीकत सामने ला दी। जिला मुख्यालय पर फ्लाईओवर से जुड़े सर्विस लेन और इमरती कॉलोनी के आसपास जलभराव ने राहगीरों और स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
मानसून से पहले नवागत जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने स्वयं मौके पर पहुंचकर जलनिकासी की स्थिति का जायजा लिया था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जलभराव से निजात दिलाने के लिए प्रभावी इंतजाम करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद पहली ही जोरदार बारिश में स्थिति बिगड़ने से अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर हर साल बैठकों, निरीक्षणों और निर्देशों के बाद भी जलनिकासी का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पा रहा है?
2015-16 में पूरा हुआ था निर्माण, समस्या आज भी बरकरार -
बताते चलें कि वर्ष 2015-16 में वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग के चौड़ीकरण के साथ जिला मुख्यालय पर फ्लाईओवर का निर्माण पूरा हुआ था। हाईवे के पानी की निकासी के लिए नाला बनाया गया, लेकिन उसका नगर की नालियों से समुचित जुड़ाव नहीं होने के कारण निचले इलाकों में जलभराव की समस्या लगातार बनी रही।
दक्षिणी छोर पर इमरती कॉलोनी के पास भारी बारिश में जलभराव की स्थिति लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। वहीं करीब तीन किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर से जुड़े सर्विस लेन पर भी बारिश के बाद पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित होता है। ऐसे में सवाल यह है कि जब समस्या एक-दो साल पुरानी नहीं बल्कि करीब एक दशक से अधिक समय से सामने है, तो इसका स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हो सका?
बारिश ने खोली व्यवस्था की पोल, सोशल मीडिया पर भी घमासान -
इस बार मानसून में हुई तेज बारिश के बाद जलभराव का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। आमजन की नाराजगी के बीच सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। विपक्ष ने इसे लेकर सरकार और जनप्रतिनिधियों को घेरना शुरू कर दिया।
सपा के पूर्व घोरावल विधायक रमेश चंद्र दुबे ने जलभराव का वीडियो सोशल मीडिया पर जारी कर वर्तमान सरकार और जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सपा सरकार आने पर 24 घंटे में बदलाव दिखाई देगा और मुख्यालय की समस्या का समाधान नहीं करा पाने वाले सदर विधायक को भी इस्तीफा देना चाहिए।
वहीं नगर पालिका अध्यक्ष रूबी प्रसाद ने जलभराव के लिए फ्लाईओवर की डिजाइन और जलनिकासी व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर के कारण पानी का निकास प्रभावित हुआ है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने सीएनडीएस की ओर से निर्माणाधीन नाले के निर्माण की गुणवत्ता और तरीके पर भी सवाल उठाए।
अगस्त में सामान्य से कहीं ज्यादा बरसा पानी -
बारिश के आंकड़े भी इस बार सोनांचल में बदले मौसम का संकेत दे रहे हैं। जहां अगस्त 2025 में जिले की औसत वर्षा 270 मिमी दर्ज की गई थी, वहीं अगस्त 2026 में यह बढ़कर 438.5 मिमी रिकॉर्ड की गई। यानी बारिश ने पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार काफी अधिक जोर दिखाया है। बीते दिन से अब तक जिले में विभिन्न क्षेत्रों में हुई वर्षा में रॉबर्ट्सगंज में 140 मिमी, दुद्धी में 42 मिमी, घोरावल में 53 मिमी और ओबरा में 21 मिमी बारिश दर्ज की गई।
सोन नदी खतरे के निशान से महज आधा मीटर नीचे -
बारिश के बीच सोन नदी का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। वर्तमान जलस्तर 170.49 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि खतरे का निशान 171 मीटर है। यानी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज करीब 0.51 मीटर नीचे है।
बांधों की स्थिति भी प्रशासन के लिए निगरानी का विषय बनी हुई है। नगवां बांध का अधिकतम जलस्तर 354.60 मीटर के मुकाबले वर्तमान जलस्तर 353.81 मीटर, धनरौल का 317.90 के मुकाबले 316.06 मीटर और ओबरा का 193.24 के मुकाबले 192.85 मीटर दर्ज किया गया। रिहंद बांध का अधिकतम जलस्तर 265.18 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 265.60 मीटर दर्ज किया गया है। कनहर बांध का अधिकतम जलस्तर 265.55 मीटर के मुकाबले वर्तमान जलस्तर 262.60 मीटर है।
आपदा विभाग अलर्ट, निगरानी का दावा -
जिला आपदा अधिकारी अरुण कुमार यादव ने बताया कि "लगातार हो रही बारिश को देखते हुए जिले में स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है। नदी, बांधों और जलभराव वाले संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर संबंधित विभागों से लगातार जानकारी ली जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील किया है कि तेज बारिश और बढ़ते जलस्तर के दौरान नदी-नालों एवं जलभराव वाले स्थानों के पास अनावश्यक रूप से न जाएं तथा प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करें।"
"हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं है कि जब एक दशक से जलभराव की बीमारी सामने है और हर मानसून से पहले समाधान के दावे किए जाते हैं, तो पहली तेज बारिश में वही तस्वीर क्यों लौट आती है? सोनभद्र जिला मुख्यालय की सड़कों पर जमा पानी अब महज बारिश की समस्या नहीं, बल्कि जलनिकासी व्यवस्था की स्थायी खामी के साथ-साथ जिले के आला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की पर बड़ा सवाल बन चुका है। ऐसे में जिम्मेदारों पर जिलाधिकारी क्या एक्शन लेते हैं यह देखने वाली बात होगी।"




