Sonbhadra News : "जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना,अंधेरा धरा पर कहीं रह....।
दीपावली का त्योहार हमें अपने जीवन मे निराशा रूपी अंधकार को दूर कर नई आशा रूपी प्रकाश से अपने जीवन को प्रकाशमय करने का संदेश देती है

प्रतीकात्मक फोटो
सोनभद्र
3:19 PM, October 30, 2024
धर्मेन्द्र गुप्ता(संवाददाता)
विंढमगंज(सोनभद्र)।दिवाली एक धार्मिक, विविध रंगों के प्रयोग से रंगोली सजाने, प्रकाश से सुसज्जित औऱ खुशी का बुराई रूपी अंधकार को हटाकर खुशियाँ मनाने का त्यौहार है। गोपालदास' नीरज' द्वारा रचित उक्त पंक्तियां- "जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना,अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए...... "
दीवाली के रहस्य को सजोये हुए हम सभी के लिए प्रेरणाश्रोत है। यह त्यौहार हमें अपने जीवन में निराशा रूपी अंधेरे को दूर कर आशाओं के संचार द्वारा अपने जीवन में उजाला भरने का संदेश देती है।यह त्यौहार पूरे भारत के साथ साथ देश के बाहर भी कई स्थानों पर मनाया जाता है।
यह पाँच दिवसीय त्यौहार है जो धनतेरस से शुरु होकर भैया दूज तक मनाई जाती है। दशहरे के बाद सबसे बड़ा मनाया जाने वाला त्योहार दिवाली है जो कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है।
प्रथम दिन गोवत्स द्वादशी, दूसरे दिन धनतेरस जिसे धन त्रयोदशी भी कहा जाता है।तीसरे दिन नरक चतुर्दशी, जिस दिन दीपावली का त्योहार मनाया जाता है।चतुर्थ दिन गोबर्धन पूजा याअन्नकूट पूजा के रूप में मनाते हैं तथा पाँचवे दिन भैयादूज के पर्व के साथ पाँच दिवसीय त्योहार की समाप्ति होती है।
भारतीय त्योहारों का बिशेष महत्व होता है जिसके माध्यम से हमें स्वयं को अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाने की प्रेरणा मिलती है। घर के चारों ओर दिये और मोमबत्ती जलाकर पुरे घर को प्रकाशित किया जाता है। दिवाली का त्यौहार वर्ष का सबसे सुंदर और शांतिपूर्ण समय लाता है जो मनुष्य के जीवन को खुशियों से भर देता है।
क्यों मनाते है दीवाली-




