जानकारी के अनुसार, जमीन से जुड़े एक मामले में अधिवक्ता के जरिए एसडीएम की अदालत में यूपी राजस्व संहिता 2006 की धारा 212 (2) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया। मांग की गई कि, उनसे जुड़ा प्रकरण तहसीलदार के न्यायालय में लंबित है। तहसीलदार न्यायालय से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है, इसलिए पत्रावली दूसरी कोर्ट में स्थानांतरित की जाए। इस पर एसडीएम की ओर से तहसीलदार न्यायालय से पत्रावली के स्थिति की जानकारी मांगी गई। बताया जा रहा है कि गत 26 मार्च को इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें कहा गया पत्रावली आदेश के लिए सुरक्षित है। आख्या आने के बाद जब एसडीएम ने आगे की कार्यवाही के लिए पत्रावली तलब की तो पता चला कि, जिस तिथि को आख्या भेजी गई, पत्रावली में उससे पांच दिन पहले ही निर्णय पारित हो चुका है।