Sonbhadra News : सर्दी कम होते ही लोगों के लिए आफत बने "मच्छर", कागजों पर सीमित बचाव इंतजाम
फरवरी माह के दूसरे सप्ताह में ठंड कम होने से गर्मी की आहट आने लगी है। दिन और रात के तापमान में बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है लेकिन अभी ठंड पूरी तरह विदा भी नहीं हुई कि शहर से लेकर गांव तक मच्छरों......

एनिमेटेड फोटो....
sonbhadra
6:41 PM, February 16, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । फरवरी माह के दूसरे सप्ताह में ठंड कम होने से गर्मी की आहट आने लगी है। दिन और रात के तापमान में बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है लेकिन अभी ठंड पूरी तरह विदा भी नहीं हुई कि शहर से लेकर गांव तक मच्छरों की भनभनाहट ने लोगों की नींद हराम कर दी है। यह समस्या शहर से लेकर गांव तक बनी हुई है लेकिन गांव की अपेक्षा यह स्थित नगर पालिका क्षेत्र में कुछ अधिक ही विकट है। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण नाले-नालियों के चोक हो जाने से होने वाला जल जमाव होता है। इसके साथ ही शहर के न्यू कॉलोनी, रेलवे क्रॉसिंग, हर्ष नगर, विकास नगर कॉलोनी, अम्बेडकर नगर कॉलोनी सहित अन्य मोहल्लों में खाली प्लाट व सड़क किनारे बने गड्डों में कई जगह पानी भरा रहता है जो मच्छरों के पनपने के लिए एक अनुकूल वातावरण हो जाता है। इसके चलते इन क्षेत्र के लोगों को कुछ दिनों को छोड़कर लगभग साल भर मच्छरों से जूझना पड़ता है। मच्छरों के प्रकोप से आये दिन लोग डेंगू व मलेरिया से पीड़ित होकर इलाज के लिए जिला अस्पताल व निजी चिकित्सकों की शरण लेते हैं।
मच्छरों से बचाव के लिए कागजों पर बनती हैं योजनाएं -
घने जंगल, सोन, रेणुका, बिजुल, कनहर नदी के किनारे बसे गांव तथा बाढ़ प्रभावित निचले इलाके साल भर जलभराव झेलते हैं। दलदली जमीन और ठहरे पानी में मच्छरों की भरमार रहती है। हजारों की संख्या में ग्रामीण रोगवाहक वेक्टरों के खून चूसने से डेंगू, मलेरिया और अन्य संचारी रोगों की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता अभियान तो चलाए जा रहे हैं, लेकिन मच्छरों की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम न उठाए जाने से लोग नाराज हैं। तहसील और नगर निकाय क्षेत्रों में फॉगिंग व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य महकमा पहले से तैयारी करने के बजाय 'संचारी रोग नियंत्रण अभियान' जैसे कार्यक्रम कागजों में पूरा दिखाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है। फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव का व्यापक अभियान अभी धरातल पर प्रभावी रूप में नहीं दिख रहा। कस्बों और मोहल्लों में सूरज ढलते ही मच्छरों का हमला शुरू हो जाता है। लोग घरों के बाहर बैठने से कतराने लगे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। कई परिवारों ने मच्छरदानी और कॉइल का सहारा लिया है, लेकिन पर्याप्त राहत नहीं मिल रही
बोले लोग -
अधिवक्ता अनूप पाण्डेय ने बताया कि "कहने को तो हम लोग शहरी क्षेत्र में रहते हैं लेकिन साफ-सफाई में ग्रामीण क्षेत्र के मुकाबले पिछड़े दिखाई पड़ते हैं।"
शहरवासी वत्स कुमार मिश्रा ने बताया कि "टोला-मोहल्ले में सड़क के बीच बनाये गये नाले पर रखे ढक्कन टूट कर गायब हो जाने से नाला कई जगह खुला हुआ है।"
शहरवासी बाला देवी ने बताया कि "नगर पालिका प्रशासन को यह प्रयास करना चाहिये कि किसी खाली प्लाट में पानी न जमा होने पाये। खाली प्लाट में पानी जमा होने से बड़ी संख्या में मच्छर पनप जाते हैं।"




