वहीं प्रदेश महासचिव साधना विश्वकर्मा ने प्रमुम मांगों के बारे में बताते हुए कहा कि "प्रदेश में एजुकेटर भर्ती तत्काल प्रभाव से रोकी जाये, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से सिर्फ "प्री प्राइमरी शिक्षक' का कार्य ही लिया जाये जिससे वह बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दे सकें, आंगनबाड़ी केन्द्र / पाठशाला में अधिकांश कार्य उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों की तर्ज पर सम्पन्न हो रहे हैं इसलिए निर्धारित समय में ही सभी कार्य पूर्ण करायें जायें तथा निर्धारित समयावधि के पश्चात कोई भी अधिकारी एवं कर्मचारी आंगनबाड़ी अन्य कार्यों को नहीं करवाएं, आंगनबाड़ी केंद्र/पाठशाला में पंजीकृत बच्चों एवं अन्य लाभार्थियों के स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाएं एएनएम/आशा एवं आशासंगिनी से ली जाये, सभी प्रकार की पोषण सामग्री का वितरण तत्काल प्रभाव से आंगनबाड़ी केंद्र/पाठशाला पर बंद किया जाये और पोषण सामग्री धनराशि सीधे लाभार्थियों के बचत खाते में भेजी जाये क्योंकि पोषण सामग्री के नाम पर कमीशनखोरी एवं घोटाला अधिकारी करवाते हैं और उनकी ही जेबें भरती हैं और बदनामी आंगनबाड़ियों की होती है। पोषण सामग्री का वितरण एकल व्यवस्था के तहत कोटा डीलर एवं स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कराई जाये तथा पीएलआई की धनराशि हमारे स्थान पर उन्हें ही दे दी जाये, सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्रेच्युटी सम्बन्धी आदेश आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों हेतु तत्काल प्रभाव से लागू कराया जाये तथा प्रमोशन हेतु निर्धारित 50 वर्ष आयु सीमा बंधन समाप्त किया जाये।"