Sonbhadra News : आँवला वृक्ष की पूजा कर मनाया गया अक्षय नवमी का पर्व
कार्तिक मास में पड़ने वाला अक्षय नवमी का पर्व सोनभद्र में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर लोगों ने आंवले के वृक्ष का पूजन और आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन करके आध्यात्मिक की सुख की....

आँवला वृक्ष की पूजा करती महिलाएं...
sonbhadra
9:49 PM, November 10, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• अक्षय नवमी पर जनपद के मंदिरो, धार्मिक स्थलों पर विविध प्रकार के धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों का भी हुआ आयोजन
• धूमधाम से मनाया गया अक्षय नवमी का पर्व
सोनभद्र । कार्तिक मास में पड़ने वाला अक्षय नवमी का पर्व सोनभद्र में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर लोगों ने आंवले के वृक्ष का पूजन और आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन करके आध्यात्मिक की सुख की अनुभूति किया। जिला मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के दंडईत बाबा मंदिर परिसर में स्थित आंवले के पेड़ की पूजा की और अक्षय नवमी से संबंधित कहानियां सुनी तथा विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर चढ़ाया गया। और आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
बता दें कि मंगलवार को पूरा दंडईत बाबा मंदिर परिसर पिकनिक स्पॉट बन गया था। यहां पर लोगों की काफी भीड़ देखी गई। कार्तिक मास की अष्टमी को गोपाष्टमी और नवमी को आंवला नवमी भी कहते हैं। गोपाष्टमी पर गो, ग्वाल और कृष्ण को पूजने का महत्व है तो आंवला नवमी पर आंवले के वृक्ष के पूजन का महत्व है।
गोपाष्टमी के बारे में लोक मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण को गौ चराने के लिए मां यशोदा ने जंगल भेजा था। इस दिन प्रातःकाल गौओं को स्नान कराकर जल, अक्षत, रोली, गुड, जलेबी, वस्त्र तथा धूप-दीप से आरती उतारते हैं। संध्याकाल गायों के जंगल से वापस लौटाने पर उनके चरणों को धोकर तिलक लगाना की परंपरा आज भी कायम है।
साहित्यकार प्रतिभा देवी ने बताया कि “आंवला नवमी पर आंवले के वृक्ष की पूजा और इसके वृक्ष के नीचे भोजन करने की प्रथा की शुरुआत करने वाली माता लक्ष्मी मानी जाती हैं।"




